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पाक बाल-बंदियों पर ऐमनेस्टी की चिंता

ऐमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि पाकिस्तान की जेलों में लगभग साढ़े चार हज़ार बच्चे क़ैद हैं और उनमें से दो-तिहाई ऐसे हैं जिन पर अभी तक कोई अपराध भी दायर नहीं हुआ है.

पाकिस्तान में बाल-बंदियों के बुनियादी अधिकारों पर जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों को कई बरस इस लिए जेल में गुज़ार देने पड़ते हैं क्योंकि माता-पिता उनकी ज़मानत कराने की क्षमता नहीं रखते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मामले जब अदालत में आते हैं तो उनमें से मात्र पंद्रह प्रतिशत पर ही अपाराध दायर हो पाता है.

संस्था के मीडिया निर्देशक लेस्ली वॉर्नर का कहना है, "क़ानून व्यस्था बंदी बनाए गए बच्चों के अभिभावक की भूमिका निभाने में विफल रही है और जजों को भी बच्चों के अधिकारों की पूरी जानकारी नहीं है".

रिपोर्ट में कई मामलों का हवाला दिया गया है जिनमें तेहर साल के एक उस लड़के का मामला भी शामिल है जिसे चार साल जेल में इसलिए रहना पड़ा क्योंकि उसका आरोप-पत्र खो गया था.

ज़मानत देने में असमर्थ

रिपोर्ट के अनुसार ज़मानत आमतौर पर पचास हज़ार रुपये होती है जबकि पाकिस्तान में एक सरकारी कर्मचारी तक सात हज़ार रुपये महीने से ज़्यादा तनख़्वाह नहीं पाता है.

कहा गया है कि बच्चों को भी वयस्कों की कोठरी में रखा जाता है जो पाकिस्तान के अपने ही क़ानूनों का उल्लंघन है.

कई बार बारह साल तक के बच्चों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते समय एक ही ज़ंजीर से बाँध दिया जाता है.

ऐमनेस्टी का कहना है कि पिछले साल पंजाब की जेलों में साढ़े तीन सौ बच्चे मौत की सज़ा का इंतज़ार कर रहे हैं जबकि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़न ने उनकी सज़ा माफ़ कर दी है.

वैसे अपराधों का शिकार हुए लोगों के परिवारजनों का कहना है कि ये अपराधी बच्चे हैं हीं नहीं.

रिपोर्ट में सरकार से मांग की गई है कि जहाँ भी मुमकिन हो बच्चों को ऐसी सज़ा सुनाई जाए जिसमें उन्हें हिरासत में न रहना पड़े.