पाकिस्तान और सऊदी अरब ने 'आतंकवाद' का मुक़ाबला करने और मध्य पूर्व संकट को शांतिपूर्ण हल के लिए एकजुट होकर प्रयास करने का आहवान किया है.
लेकिन दोनों ही देशों ने यह भी कहा है कि जब तक इराक़ के लोग ख़ुद सेना भेजने के लिए नहीं कहते वे अपने सैनिक वहाँ नहीं भेजेंगे.
सऊदी अरब के प्रिंस अब्दुल्ला बिन अब्दुल अज़ीज़ के पाकिस्तान दौरे के दौरान दोनों देश इस पर सहमत हुए हैं.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने उनके सम्मान में भव्य दावत का आयोजन किया.
इस दावत के मौक़े पर अब्दुल्ला ने कहा, "हत्यारे और आतंकवादी इस्लाम के दुश्मन हैं और वे इस्लाम की तमाम संस्कृति और सभ्यता को तहस-नहस करना चाहते हैं."
"हम उन्हें इन इरादों में कामयाब नहीं होने देंगे."
सैनिक नहीं
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा, "मज़हबी अतिवाद और चरमपंथ इसलिए बढ़ा है क्योंकि समस्याओं का हल निकालने के लिए ईमानदारी से कोशिशें नहीं हुई हैं."
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने फ़लस्तीन और कश्मीर मुद्दों के भी न्यायसंगत हल निकाले जाने का आह्वान किया.
बाद में दोनों देशों के विदेशमंत्रियों ने अपनी मुलाक़ात में इराक़ में तब तक अपने सैनिक भेजने की संभावना से इनकार किया जब तक कि ख़ुद इराक़ी लोग इसके लिए अनुरोध नहीं करेंगे.
दोनों विदेश मंत्रियों ने कहा कि अभी इराक़ी लोगों की तरफ़ से ऐसा कोई अनुरोध नहीं आया है.
प्रिंस अब्दुल्ला की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक संबंध और बढ़ाने पर भी ख़ास ज़ोर दिया गया.