पाकिस्तान ने मंगलवार 14 अक्तूबर को परमाणु क्षमता वाली एक और मिसाइल शाहीन का सफल परीक्षण किया है.
11 दिन में परमाणु हथियारों की क्षमता से संपन्न मिसाइलों का यह लगातार तीसरा परीक्षण किया था.
सेना ने इस परीक्षण को सफल बताते हुए कहा कि मौजूदा परीक्षणों का सिलसिला इसी के साथ ख़त्म हो गया.
हालाँकि सेना ने यह भी कहा है कि लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का परीक्षण भी निकट भविष्य में किया जा सकेगा.
पाकिस्तान के ऐसे परीक्षणों से भारत को चिंता होती है और अगर भारत कोई परीक्षण करता है तो उस पर पाकिस्तान अपनी चिंता ज़ाहिर करता है.
अगर दोनों देशों के हथियार और मिसाइल कार्यक्रम पर नज़र डालें तो लगता है जैसे दोनों पड़ोसियों के बीच परीक्षणों की होड़ सी लगी हुई है.
इस होड़ की गवाह कुछ घटनाएँ या परीक्षण हैं जो दोनों देश 1998 से करते आए हैं:
1998
अप्रैल में पाकिस्तान ने ज़मीन से ज़मीन पर 1500 किलोमीटर तक मार कर सकने वाली ग़ौरी मिसाइल का पहला परीक्षण किया.
उसके अगले ही महीने मई में पहले भारत ने परमाणु परीक्षण करके दुनिया को हिला दिया. पाकिस्तान भी भला क्यों पीछे रहता. उसने भी कुछ ही दिन के अंतर से परमाणु परीक्षण कर डाले.
1999
पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की और ग़ौरी मिसाइल के दूसरे संस्करण का परीक्षण किया. ग़ौरी 1500 किलोमीटर तक और शाहीन 800 किलोमीटर तक मार कर सकती है.
2000
फ़रवरी में पाकिस्तान ने कम दूरी तक ज़मीन से ज़मीन पर मार सर सकने वाली बैलिस्टिक मिसाइल हत्फ़-एक का परीक्षण किया और इसकी मारक क्षमता सौ किलोमीटर तक बताई गई.
2002
25 जनवरी को भारत ने मध्यम दूरी तक ज़मीन से ज़मीन पर मार करने वाली मिसाइल अग्नि के पहले संस्करण का परीक्षण किया जिसे मध्यम दूरी तक मार करने वाला बताया गया.
यह 700 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है.
पाकिस्तान ने इस पर गहरी चिंता जताई और कहा कि भारत के इस तरह के परीक्षणों से क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है लेकिन उसने ख़ुद सब्र से काम लेने की बात कही.
28 अप्रैल को भारत ने ध्वनि की गति से भी तेज़ चलने वाली सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का परिक्षण किया और इसे ब्रहमोस का नाम दिया गया.
भारत ने इसका निर्माण रूस के सहयोग से किया.
यह 300 किलोमीटर तक मार कर सकती है और इस पर 200 किलो तक वज़न लादा जा सकता है.
भारत अग्नि से पहले पृथ्वी मिसाइल पहले ही सेना में शामिल कर चुका है. पृथ्वी 250 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है.
25 से 28 मई को पाकिस्तान ने एक के बाद एक तीन मिसाइल परीक्षण किए. कम दूरी तक मार करने वाली अब्दाली और ग़ज़नवी जो 180 से 290 किलोमीटर और 110 से 180 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं.
इनके अलावा एक लंबी दूरी तक मार करने वाली ग़ौरी मिसाइल का भी परीक्षण कर लिया.
भारत ने 24 सितंबर को कम दूरी तक मार करने वाली त्रिशूल मिसाइल को परखा जो नौ किलोमीटर तक ज़मीन से हवा में मार कर सकता है.
थोड़े ही दिन बाद चार अक्तूबर को पाकिस्तान ने मध्यम दूरी तक मार करने वाली शाहीन या हत्फ़ बैलिस्टिक मिसाइल के चौथे संस्करण का परीक्षण कर डाला.
2003
भारत ने नौ जनवरी को ज़मीन से ज़मीन पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि के मध्यम दूरी के संस्करण का परीक्षण किया.
क़रीब एक सप्ताह बाद ही भारत ने ज़मीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल का 18 जनवरी को परीक्षण किया.
आकाश मिसाइल 55 किलो वज़न ले जा सकती है.
दो दिन बाद ही 20 जनवरी को भारत ने आकाश का एक और परीक्षण किया.
भारत ने 12 फ़रवरी को सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ब्रहमोस का परीक्षण किया.
उसके बाद भारत और पाकिस्तान में होड़ कुछ तेज़ होती नज़र आई और 26 मार्च को दोनों ने एक साथ ज़मीन से ज़मीन पर मार करने वालि मिसाइलों के परीक्षण किए.
भारत ने पृथ्वी को परखा तो पाकिस्तान ने अब्दाली मिसाइल को.
29 अप्रैल को भारत ने पृथ्वी मिसाइल को एक बार फिर परखा.
पाकिस्तान ने तीन अक्तूबर को ज़मीन से ज़मीन पर मार कर सकने वाली बैलिस्टिक मिसाइल ग़ज़नवी या हत्फ़ के तीसरे संस्करण का परीक्षण किया.
यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और 290 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है.
उसके एक ही सप्ताह के अंदर आठ अक्तूबर को पाकिस्तान ने ज़मीन से ज़मीन पर मार करने वाले बैलिस्टिक मिसाइल हत्फ़ के चौथे संस्करण का परीक्षण किया.
यह परमाणु हथियारों के साथ 700 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकता है.
और 14 अक्तूबर को हत्फ़ के चौथे संस्करण का एक बार फिर परीक्षण हुआ और इसे कम दूरी की मिसाइलों के परीक्षण का ख़ात्मा बताया गया.