शनिवार, 04 जुलाई, 2009 को 23:54 GMT तक के समाचार
ईरान में आधिकारिक मीडिया का कहना है कि वहाँ मादक पदार्थों की तस्करी के लिए 20 लोगों को मौत की सज़ा दी गई है.
इन लोगों को तेहरान के पास कराज जेल में फांसी की सज़ा दी गई. इन्हें मादक पदार्थ खरीदने, बेचने और अपने पास रखने का दोषी पाया गया था.
रिपोर्टों के मुताबिक इन लोगों से 700 किलोग्राम से ज़्यादा हेरोइन, कोकेन और अफ़ीम बरामद की गई थी. ये सब लोग पिछले पाँच सालों को दौरान गिरफ़्तार किए गए थे.
ईरानी समाचार एजेंसियों के मुताबिक जिन लोगों को फाँसी दी गई उनकी उम्र 35 से 48 साल के बीच थी.
मानवाधिकार गुटों का कहना है कि चीन को छोड़ दें तो ईरान में सबसे ज़्यादा लोगों को मौत की सज़ा दी जाती है.
मौत की सज़ा
एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक 2008 में ईरान में 346 लोगों को मौत की सज़ा दी गई.
लेकिन इतने लोगों को एक दिन में एक साथ फाँसी लगने की घटना कम ही सुनने में आई है.
शनिवार को ईरान के सुप्रीम कोर्ट ने इन लोगों की तरफ़ से माफ़ीनामे की अपील नामंज़ूर कर दी थी.
मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि ईरान में मौत की सज़ा का बहुत ज़्यादा प्रयोग होता है.
लेकिन ईरान का कहना है कि ये काफ़ी कारगर साबित हुआ है क्योंकि लोग अपराध करने से डरते हैं और ये सज़ा लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही दी जाती है.
हालांकि 2008 में ईरान में सरेआम फाँसी देने की प्रथा को नियंत्रित करने की पहल हुई थी. किसी को सार्वजनिक रूप से फाँसी देने से पहले मुख्य न्यायाधीश की अनुमति लेनी होगी.
फाँसी की तस्वीर प्रकाशित करने या उसकी फ़िल्म प्रसारित करने पर भी रोक लगा दी गई है.
ईरान में हत्या, बलात्कार, डकैती, मादक द्रव्यों की तस्करी और समलैंगिक संबंध बनाना ऐसे अपराध हैं जिनके लिए फाँसी की सज़ा का
प्रावधान है