रविवार, 08 मार्च, 2009 को 02:07 GMT तक के समाचार
अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने स्पष्ट कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका सफल नहीं हो पा रहा है और वहाँ तालेबान के उदारवादी धड़े से बातचीत संभव है.
ओबामा का कहना था, "इराक़ में अमरीकी सेना कुछ कट्टरपंथी इस्लामी नेताओं को वार्ता के लिए राज़ी करने में सफल रही क्योंकि वे अपने आपको अल क़ायदा की रणनीतियों से अलग-थलग महसूस कर रहे थे."
न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "इसी तरह के अवसर अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तानी इलाक़ों में हो सकते हैं लेकिन वहाँ की स्थितियाँ ज़्यादा पेचीदा हैं."
ये पूछे जाने पर कि क्या अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका की जीत हो रही है, उनका कहना था - नहीं.
हालाँकि ओबामा ने ज़ोर देकर कहा कि उनकी सेना बेहद मुश्किल स्थितियों में असाधारण काम कर रही है.
तालेबान के बढ़ते ख़तरे को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, "आपने देखा है कि पिछले कुछ वर्षों में वहाँ स्थितियाँ ख़राब हुई हैं. तालेबान पहले से ज़्यादा मज़बूत है. मैं मानता हूँ कि दक्षिणी हिस्से में वो ऐसे हमले कर रहे हैं जैसे पहले नहीं होते थे."
मुश्किल स्थिति
अमरीकी राष्ट्रपति का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान में शासन उतना मज़बूत नहीं है और वहाँ स्थानीय कबायली सरदारों में अपने आपको आज़ाद रखने का इतिहास रहा है.
जनरल डेविड पेट्रॉस समेत कई अमरीकी सैन्य कमांडर तालेबान के साथ बातचीत करने पर विचार करते रहे हैं जिनका ज़िक्र ओबामा ने भी किया.
उनका कहना था, "अगर आप जनरल पेट्रॉस से बात करें तो मैं मानता हूँ कि वो तर्क देंगे कि इराक़ में उन लोगों तक पहुँचना भी सफलता का एक पहलू था जिन्हें हम इस्लामी कट्टरपंथी कह सकते हैं लेकिन वे हमारे साथ काम करने के लिए तैयार थे."
ओबामा ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तानी इलाक़े में भी इराक़ से तुलना हो सकती है, हालाँकि वहाँ स्थितियाँ ज़्यादा पेचीदा है.
पिछले महीने रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने कहा था कि अफ़ग़ान सरकार और तालेबान के बीच राजनीतिक समझौते को अमरीका स्वीकार कर सकता है बशर्ते चरमपंथी हथियार डाल दें और सरकार की शर्तों को मान लें.