मंगलवार, 17 फ़रवरी, 2009 को 20:08 GMT तक के समाचार
कई हफ़्तों की बातचीत और राजनीतिक दांव पेंचों के बाद राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अर्थव्यवस्था के लिए क़रीब आठ खरब डॉलर के पैकेज संबंधी क़ानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.
ओबामा ने डेनवर में आयोजित समारोह में कहा कि ''यह क़ानून अमरीका के इतिहास में सबसे बड़ा पैकेज होगा.''
ओबामा इस क़ानून के लिए पूरे सदन का समर्थन चाहते थे जिसे रिपब्लिकन पार्टी ने ख़ारिज कर दिया. रिपब्लिकन पार्टी चाहती थी कि सरकारी खर्चे कम हों और करों में अधिक कटौती की जाए.
रिपब्लिकन पार्टी के मात्र तीन सांसदों ने इस पैकेज के समर्थन में वोट डाला.
इस नए पैकेज के तहत देश भर में नई परियोजनाएं, स्वास्थ्य सेवाएं, संरक्षण कार्यक्रम इत्यादि शुरु करने की योजना है.
पैकेज के बारे में ओबामा का कहना था, '' मैं ये नहीं कहना चाहूंगा कि आज का दिन हमारी आर्थिक समस्याओं के ख़त्म होने का दिन है और न ही ये वो सबकुछ है जो हम आने वाले दिनों में करने वाले हैं लेकिन मैं इतना ज़रुर कहूंगा कि ये हमारी समस्याओं के ख़त्म होने की शुरुआत ज़रुर है. ''
डेनवर के एक संग्रहालय में आयोजित समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए ओबामा का कहना था, '' अमरीकी अर्थव्यवस्था की नींव को मज़बूत करने की दिशा में यह हमारा पहला क़दम है. ''
संवाददाताओं का कहना है कि दुनिया भर में स्टॉक मार्केटों में गिरावट देखी जा रही है क्योंकि निवेशकों को लग रहा है कि यह आर्थिक पैकेज अमरीकी अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने के लिए पर्याप्त नहीं है.
इस आर्थिक पैकेज में 'अमरीकी सामान खरीदने' संबंधी विवादास्पद प्रस्ताव को भी जगह दी गई है जिसका अमरीका के साथ व्यापार करने वाले देशों ने खंडन किया है.
सोमवार को ब्राज़ील के विदेश मंत्री सेल्सो अमोरिम ने इस प्रस्ताव को विश्व व्यापार संगठन में चुनौती देने की धमकी दे डाली..
इस प्रस्ताव के तहत जिन परियोजनाओं को पैकेज के तहत पैसा मिलेगा उनमें केवल अमरीका में बने सामानों का ही उपयोग किया जाएगा.