शनिवार, 07 फ़रवरी, 2009 को 22:40 GMT तक के समाचार
अमरीका में मंदी की शिकार हुई कंपनियों के लिए आर्थिक पैकेज को तो मंज़ूरी मिल गई लेकिन इसके साथ ही विदेशी कर्मचारियों के लिए एक विशेष प्रावधान भी लागू कर दिया गया है.
इसमें कहा गया है कि जो कंपनियाँ आर्थिक पैकेज का लाभ लेंगीं वो एच1बी वीज़ा पर काम करने वाले कर्मचारियों को काम पर नहीं रख सकेंगीं.
बेरोज़गारी की बढ़ती दर को देखते हुए अमरीकियों की हित रक्षा के लिए यह प्रावधान रखा गया है.
इसका सीधा असर अमरीका में काम करने गए विदेशियों पर पड़ेगा.
आशंका जताई जा रही है कि इसका सबसे अधिक असर उन भारतीयों पर पड़ेगा जो आईटी पेशेवर की तरह वहाँ गए हुए हैं.
सख़्त प्रावधान
शुक्रवार को सीनेट ने आर्थिक पैकेज को मंज़ूरी देते हुए यह प्रावधान लागू किया है.
पहले इस पैकेज में यह प्रावधान नहीं था लेकिन बाद में इसे पैकेज के साथ जोड़ दिया गया.
इसके तहत आर्थिक सहायता प्राप्त करने वाली कंपनियाँ अगले दो साल तक एच1बी वीज़ा वाले कर्मचारियों को काम पर नहीं रख सकेंगीं. ख़ासकर तब जबकि उन्होंने पिछले छह महीनों में अमरीकी कर्मचारियों को काम पर से हटाया हो.
मतलब साफ़ है कि ऐसी कंपनियों को रिक्त पदों पर कम से कम दो सालों के लिए सिर्फ़ अमरीकियों को काम पर रखना होगा.
पैकेज के साथ यह संशोधन लाने वाले रिपब्लिकन सीनेटर चक ग्रैसली ने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है कि एच1बी वीज़ा वाले कर्मचारियों के साथ काम करने वाली कंपनियों को इस पैकेज का लाभ नहीं मिल सकेगा.
उन्होंने एक बयान में कहा, "एक तो सहायता लेने वाली कंपनियाँ रिक्त पदों को एच1बी वीज़ा वालों को काम पर नहीं रख सकेंगीं और न वो अमरीकी कर्मचारियों को हटाकर एच1बी वाले कर्मचारियों को काम दे सकेंगीं."
इसका अर्थ यह है कि जिन कंपनियों में एच1बी वाले कर्मचारी पहले से ही काम कर रहे हैं उन्हें हटाने की आवश्यकता नहीं होगी.
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार इस प्रावधान का समर्थन करने वाले एक स्वतंत्र सीनेटर बर्नी सेंडर्स ने कहा है, "यह प्रावधान इसलिए लाया गया है ताकि अमरीकी नागरिकों के टैक्स की राशि से सहायता पाने वाली कंपनियाँ अमरीकियों को नौकरियों से हटाकर सस्ती दरों पर उपलब्ध विदेशियों को काम पर न रखने लगें."
इस प्रावधान का विरोध भी किया जा रहा है.
अप्रवासी मामलों के वकीलों की संस्था ने कहा है कि यह भय-संचालित राजनीति का प्रतीक है जिससे अमरीका की प्रगति पर विपरीत असर पड़ेगा.
इसका विरोध करते हुए नेशनल फाउंडेशन फॉर अमरीकन पॉलिसी के स्टुअर्ट एंडरसन ने कहा है, "यह एक ऐसी अविवेकी नीति है जिससे कंपनियाँ प्रतिभावान लोगों को सिर्फ़ इस आधार पर काम पर नहीं रख सकेंगी क्योकि वे अमरीका में पैदा नहीं हुए."
इस प्रावधान का सबसे अधिक असर बैंकों पर होगा क्योंकि आर्थिक पैकेज का लाभ प्राथमिक रुप से बैंकों को ही मिलने वाला है.
एपी का कहना है कि जिन बैंकों को इस पैकेज का बड़ा हिस्सा मिलने वाला है उन्होंने पिछले छह सालों में 21, 800 विदेशी कर्मचारियों को काम देने के लिए सरकार से अनुमति मांगी थी.