गुरुवार, 29 जनवरी, 2009 को 03:00 GMT तक के समाचार
अमरीका के केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व ने चेतावनी दी है कि देश में औद्योगिक उत्पादन, नई गृह निर्माण परियोजनाएँ, रोज़गार, उपभोक्ता और व्यवसायिक खर्च के क्षेत्रों में भारी कमी आई है.
फ़ेडरल रिज़र्व के मुताबिक विश्व में माँग में भी खासी कमी आ रही है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही है.
आईएमएफ़ के अनुसार उसे ऐसी संभावना लग रही है कि इस वर्ष विश्व में विकास दर मात्र 0.5 प्रतिशत रहेगी. हालाँकि उसका ये भी कहना है कि धीरे-धीरे 2010 में स्थिति बेहतर होनी शुरु हो सकती है.
उधर यूरोप में स्पेन भी उन देशों में शामिल हो गया है जो आर्थिक मंदी की चपेट में हैं. जर्मनी, इटली, ब्रिटेन अन्य प्रमुख यूरोपीय देश हैं जो आर्थिक मंदी से जूझ रहे हैं. जब किसी वित्त वर्ष में लगातार दो तिमाही में आर्थिक विकास दर में गिरावट देखी जाती है तो माना जाता है कि अर्थव्यवस्था आर्थिक मंदी के दौर से गुज़र रही है.
फ़्रांस में प्रमुख ट्रेड यूनियन ने देशव्यापी हड़ताल का आहवान किया है. हड़ताल खराब हो रही आर्थिक स्थिति और इस बारे में सरकार के कथित अपर्याप्त कदमों के विरोध में बुलाई गई है.
ब्याज दर शून्य के करीब
अमरीका में प्रतिनिधि सभा ने देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राष्ट्रपति बराक ओबामा के 825 अरब डॉलर के पैकेज को मंज़ूरी दे दी है. इस योजना को सीनेट की मंज़ूरी मिलनी बाक़ी है.
इस पैकेज के समर्थन में 244 वोट पड़े जबकि इसके ख़िलाफ़ 188 मत डाले गए. रिपब्लिकन पार्टी ने इस योजना का यह कहते हुए विरोध किया कि योजना अत्यंत मंहगी और सफल नहीं होगी.
दूसरी ओर अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व ने कहा है कि वह ब्याज दर को शून्य के आसपास रख रहा है और कमज़ोर अर्थव्यवस्था ये ज़रूरी होगा कि कुछ और देर तक ब्याज दर कम ही रहे.
लेकिन फ़ेडरल रिज़र्व के आकलन के बाद भी अमरीकी शेयर बाज़ार उछले हैं.
न्यूयॉर्क का डाओ जोंस सूचकांक 200 अंक बढ़ा जो लगभग 2.5 प्रतिशत का उछाल है.