इसराइल की विदेश मंत्री ज़िपी लिवनी ने यूरोपीय संघ से ग़ज़ा में हथियारों की तस्करी रोकने में मदद करने का अनुरोध किया है.
ब्रसेल्स में यूरोपीय विदेश मंत्रियों के साथ बैठक में ज़िपी लिवनी ने कहा है कि युद्धविराम को जारी रखने के लिए हथियारों की तस्करी रोकना आवश्यक है.
लेकिन यूरोपीय मंत्रियों का इसराइल के हमले के बाद ग़ज़ा में मानवीय सहायता जल्द से जल्द पहुँचाने पर ज़ोर था.
इस बीच फ़लस्तीनी संगठन हमास के नेता ख़ालिद मशाल ने कहा है कि अब समय आ गया है कि पश्चिमी दुनिया हमास का बहिष्कार बंद करे और हमास के साथ बातचीत शुरू की जाए.
सीरिया की राजधानी दमिश्क से दिए एक टीवी भाषण में ख़ालिद मशाल ने कहा है कि यूरोपीय देशों ने तीन वर्ष तक हमास को उखाड़ फेंकने की कोशिश की है लेकिन अब बहुत हो गया.
उनका कहना था कि अब समय आ गया है कि हमास के साथ सार्थक बातचीत की जाए.
ग़ज़ा में हमास की सरकार है और हमास ने इसराइली हमलों के बाद शुरू हुई तीन सप्ताह की लड़ाई के बाद अपनी जीत का दावा किया है.
हमास का ये भी दावा है कि उसने इसराइल को इस लड़ाई में जीत हासिल नहीं होने दी है.
आरोपों की जाँच
इधर इसराइली सेना इस तरह के दावों और आरोपों की जाँच करने जा रही है कि फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा पट्टी में हमास के ख़िलाफ़ तीन सप्ताह चले युद्ध के दौरान उसने व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस का ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से इस्तेमाल किया.
मीडिया में इस तरह की रिपोर्टें छपीं हैं और मानवाधिकार संगठनों ने भी आरोप लगाए हैं कि इसराइली सेना ने ग़ज़ा पट्टी में उन इलाक़ों में व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस के गोले छोड़े जिनसे असैनिक आबादी को नुक़सान पहुँचा हो सकता है.
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि ग़ज़ा पट्टी में उसके मुख्यालय की इमारत में सफेद फ़ॉस्फ़ोरस के तीन ऐसे गोले आकर गिरे थे जिनसे आग लग गई और उस आग में उस इमारत में रखी तमाम सहायता सामग्री तबाह हो गई.
अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत सफेद फ़ॉस्फ़ोरस का इस्तेमाल करने की इजाज़त सिर्फ़ युद्धस्थल में धुएँ की दीवार बनाने के लिए है और इसका इस्तेमाल ऐसे स्थानों पर नहीं किया जा सकता जहाँ असैनिक आबादी हो.
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्सवॉच ने कहा है कि उसके शोधकर्ताओं ने इसराइली – ग़ज़ा सीमा से सफेद फ़ॉस्फ़ोरस के गोलों को फटते देखा है.
सफेद फ़ॉस्फ़ोरस इंसान की त्वचा से चिपक जाता है और फिर माँस को जलाने लगता है.
इससे या तो आदमी की मौत हो जाती है या इस तरह के घाव छोड़ जाती है जिससे आदमी को असहनीय दर्द होता है और इस तरह के घाव भरेन में बहुत ज़्यादा समय लगता है.
इसराइली सेना का कहना है कि उसने सिर्फ़ ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया है जिनकी क़ानून के तहत इजाज़त है.
उल्लेखनीय है कि फ़लस्तीनी चिकित्सा सूत्रों का कहना है कि 27 दिसंबर को शुरू हुए इस युद्ध में 1300 से ज़्यादा फ़लस्तीनी मारे गए हैं.
इसराइली सेना के अनुसार इस लड़ाई में 13 इसराइली भी मारे गए हैं जिनमें तीन आम लोग थे.