बुधवार, 21 जनवरी, 2009 को 01:28 GMT तक के समाचार
ब्रजेश उपाध्याय
बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
बदलाव और उम्मीद के नारे पर चुन कर आए बराक ओबामा ने मंगलवार को जब अमरीका के चवालीसवें राष्ट्रपति के पद की शपथ ली तो उस ऐतिहासिक घड़ी को देखने वहां मौजूद लाखों की भीड़ के उल्लास और मुस्कान को देखते हुए शायद कहा जा सकता था कि अमरीका की मुश्किलें एक बुरे सपने की तरह खत्म हुईं.
एक नई सुबह की शुरूआत हुई.
लेकिन अमरीका में नस्ल और रंग की दीवारों को तोड़ते हुए इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले अफ़्रीकी अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने भाषण में लोगों को याद दिलाने की कोशिश की कि चुनौतियां इतनी गंभीर हैं कि वो एक दिन में नहीं सुलझाई जा सकतीं.
लेकिन ये यकीन दिलाया कि उन्हें हल किया जा सकता है.
उन्होंने लोगों को याद दिलाया आर्थिक मंदी के बारे में, इराक़ और अफ़गानिस्तान में चल रहे युद्ध के बारे में, शिक्षा और स्वास्थ्य की कमियों के बारे में और आह्वान किया मिलजुल कर एक नए अमरीका के निर्माण के लिए.
बहुत लोगों का कहना था कि अमरीका ने उनसे ऐसी उम्मीद लगा ली है मानो वो जादू की छड़ी घुमाएंगे और सब ठीक हो जाएगा.
उनका ये भाषण उन उम्मीदों को ज़मीनी धरातल पर लाने की एक बेहतरीन कोशिश था जिसमें उन्होंने बार बार अमरीका के लोगों के ताक़त के बारे में, सच्चाई, ईमानदारी और मेहनत के उसूलों के बारे में बात की.
केवल अमरीका ही नहीं पूरी दुनिया इस शपथग्रहण को देख रही थी, उनके भाषण को सुन रही थी और दुनिया के नाम भी उन्होंने संदेश दिया जो काफ़ी हद तक जार्ज बुश की नीतियों से हटकर था.
उन्होंने कहा कि केवल फ़ौजी ताक़त के दम पर अमरीका को सुरक्षित नहीं किया जा सकता न ही फ़ौजी ताकत अमरीका को हक देता है मनमानी करने का.
अलग पैगाम
और इस्लामी दुनिया के लिए उनके पास एक अलग से पैगाम था.
उन्होंने मुस्लिम दुनिया से आपसी फ़ायदे और एक दूसरे के लिए इज़्ज़त की बुनियाद पर एक नया रिश्ता कायम करने की बात की और कहा कि ऐसे नेता जो अपनी कमज़ोरी छिपाने के लिए पश्चिमी देशों पर उंगली उठाते हैं या फिर लोगों की आवाज़ चुप करने के लिए धोखे का सहारा लेते हैं उनका फ़ैसला उनके लोग ही करेंगे.
लेकिन अगर वो अपना रूख बदलें तो अमरीका हाथ बढाने को तैयार है.
उम्मीद से भरे उनके भाषण को सुनने के लिए अमरीका के हर कोने से लोग पहुंचे हुए थे.
वाशिंगटन मानो एक बड़े पार्क में बदल गया था जिस पर केवल लोग चल रहे थे, गाड़ियां नज़र नहीं आ रही थीं.
अपने भाषण के बाद जब वो व्हाइट हाउस की तरफ अपने कार का काफ़िला लेकर लौट रहे थे, उसी दौरान जॉर्ज बुश हेलीकॉप्टर पर सवार होकर टेक्सस के लिए रवाना हो रहे थे.
एक दौर ख़त्म हो रहा था, एक नया दौर शुरू हो रहा था.
देर शाम तक बच्चों और नौजवानों ने अपने नए राष्ट्रपति के सामने परेड निकाली और ये पार्टी देर रात तक जारी रही.
लेकिन बुधवार की सुबह का खाका बराक ओबामा की टीम तैयार कर चुकी है.
उनकी वेबसाइट बिल्कुल चुनाव के दिनों की तरह आनेवाले दिनों के एजेंडा के साथ तैयार है.
बुधवार को इराक और अर्थव्यवस्था दोनों ही पर एक अहम बैठक हो रही है.
इशारा साफ़ है कविता करने का वक्त खत्म हुआ, कर्म का वक्त शुरू हुआ.