सोमवार, 29 दिसंबर, 2008 को 02:55 GMT तक के समाचार
इसरायल की वायु सेना ने ग़ज़ा पट्टी में एक इस्लामिक विश्वविद्यालय और हमास के कार्यालय पर ताज़ा हवाई हमले किए हैं.
इसरायल का कहना है कि वो ग़ज़ा से लगातार हो रहे हवाई हमलों को रोकने के लिए ज़मीनी कार्रवाई भी कर सकते हैं और ख़बरों के अनुसार इसरायल ने क़रीब साढे छह हज़ार रिज़र्व सैनिकों को काम पर बुलाया है.
विदेश मंत्री ज़िपी लिवनी ने साफ़ कर दिया है कि इसरायल ये हमले आत्मरक्षा में कर रहा है और ये एक सफल अभियान की शुरुआत है.
ग़ज़ा में फ़लस्तीनी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस्लामिक विश्वविद्यालय पर वायु सेना के छह विमानों ने देर रात हमले किए जिसमें एक लेबोरेटरी को भी निशाना बनाया गया.
इस्लामिक चरमपंथी गुट हमास के कई कार्यकर्ता इसी विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं.
इससे पहले रविवार को इसरायल ने दक्षिणी ग़ज़ा पट्टी में आपूर्ति सुरंगों को भी निशाना बनाया. इसरायल के अनुसार फ़लस्तीनी इस रास्ते के ज़रिए भोजन के अलावा हथियारों की तस्करी करते थे.
संयुक्त राष्ट्र का आह्वान
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ग़ज़ा पट्टी क्षेत्र में हिंसा तुरंत रोके जाने का आहवान करते हुए कहा है कि दोनों ही पक्ष यानी इसराइल और हमास, उस क्षेत्र में गंभीर मानवीय संकट पैदा होने से रोकें और लोगों की आर्थिक ज़रूरतें पूरी करने का इंतज़ाम करें.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वक्तव्य की मंशा के बारे में अलग-अलग विचार व्यक्त किए गए हैं.
कूटनीतिकों का कहना है कि इस वक्तव्य की भाषा को बहुत ही साधारण रखा गया और सभी पक्षों से अपील को शामिल किया गया जबकि संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीनी पर्यवेक्षकों ने इसराइल की तरफ़ उंगली उठाई और युद्धविराम का स्पष्ट आहवान किया.
शनिवार को हुए भीषण हमले के बाद अब गज़ा में हालत दयनीय हो चुकी है. गज़ा के चिकित्सा अधिकारी ने बताया है कि अब भी मरने वालों की लिस्ट बनाई जा रही है लेकिन डॉक्टर और चिकित्सा कर्मचारी लगातार लाये जा रहे घायलों और मृतकों की संख्या से जूझ रहे हैं.
अस्पतालों पर ज़रूरत से ज़्यादा दबाव पड़ रहा है और डॉक्टरों का कहना है कि वे सैकड़ों घायलों को संभाल पाने में बहुत मुश्किल का सामना कर रहे हैं.
ग़ज़ा में अंतरराष्ट्रीय रैडक्रॉस समिति के प्रवक्ता इयाद नसर ने बीबीसी को बताया कि अस्पतालों में ज़रूरी सामान की कमी हो रही है.
उनका कहना था, ''कई महीनों तक ग़ज़ा की इसराइली नाकेबंदी की वजह से अस्पतालों की हालत पहले से ही ख़राब है और ताज़ा इसराइली हमले की वजह से अस्पतालों के संसाधनों पर बहुत बड़ा दबाव है जो घायलों को संभाल पाने में नाकाम है.''
इस बीच ग़ज़ा पट्टी में इसराइली हमलों के विरोध में मध्य पूर्व क्षेत्र के अनेक देशों में प्रदर्शन हुए हैं. जॉर्डन में प्रदर्शनकारियों ने इसराइली झंडे जलाए और इसराइली दूतावास को बंद किए जाने की माँग भी की.
तुर्की के प्रधानमंत्री ने ग़ज़ा में इसराइली हमलों को मानवता के ख़िलाफ़ अपराध बताते हुए उनकी निंदा की जिसके एक बड़े शहर इस्तांबुल में हज़ारों प्रदर्शनकारी एकत्र हुए. मिस्र में भी विरोध प्रदर्शन हुए लेकिन इस बार ख़ुद मिस्र की सरकार के ख़िलाफ़ भी.
ख़ासतौर से मिस्र से ग़ज़ा पट्टी की तरफ़ जाने वाले रास्ते नहीं ख़ोलने के लिए भी मिस्र सरकार की आलोचना हुई है.
इस बीच ईसाइयों के धर्मगुरू पोप बेनेडिक्ट ने भी ग़ज़ा पर इसराइली हमलों और वहाँ हो रही तमाम हिंसा की निंदा की है. रोम के सेंट पीटर्स चौक पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पोप ने कहा है कि लड़ाई और हिंसा के स्थान पर बातचीत को महत्व दिया जाना चाहिए. पोप बेनेडिक्ट ने कहा कि जीसस की गृहभूमि में इस तरह का ख़ूनख़राबा जारी नहीं रह सकता.
अब बड़ा सवाल ये भी है कि यह संकट कैसे हल होगा, अभी यह स्पष्ट नहीं है. इसराइल ने संभवतः अपनी बात सामने रख दी है और लगता है कि हमास भी अपना मोर्चा संभाले रखना चाहता है. लेकिन आगे के हालात जो भी बनें, एक बात स्पष्ट नज़र आती है कि हमास और इसराइल के बीच भीषण लड़ाई का यह एक और दौर है जिससे शांति की संभावना कम ही होती है.