मंगलवार, 04 नवंबर, 2008 को 15:44 GMT तक के समाचार
राजेश प्रियदर्शी
बीबीसी हिंदी डॉट कॉम
अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय मूल के कई लोग अपने उम्मीदवार को व्हाइट हाउस पहुँचाने में प्रमुख भूमिकाओं में रात-दिन जुटे हुए हैं.
रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन मैकेन के लिए समर्थन जुटाने में इक्का-दुक्का भारतीय ही लगे हैं, ज़्यादातर भारतीय डेमोक्रेट उम्मीदवार ओबामा को जिताने में जुटे हैं. वैसे भी ज़्यादातर भारतीय मूल के लोगों का रुझान डेमोक्रेट समर्थक रहा है.
दुनिया के सबसे अहम माने जाने वाले इस चुनाव में बड़ी भूमिका निभाने वाले भारतीय चेहरों का संक्षिप्त परिचय.
प्रीता बंसल
उत्तर प्रदेश के रूड़की ज़िले में पैदा हुईं प्रीता बसंल पेशे से वकील हैं. ओबामा को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार, इमिग्रेशन और वैदेशिक मामलों पर सलाह देने के अलावा प्रीता भारतीय समुदाय में उनकी पैठ बढ़ाने में जुटी रहती हैं.
विश्व प्रसिद्ध हार्वड लॉ स्कूल से पढ़ीं 42 वर्षीय प्रीता न्यूयॉर्क की एक लॉ फर्म में पार्टनर हैं, वे इससे पहले बिल क्लिंटन प्रशासन के साथ तीन वर्ष तक काम कर चुकी हैं. उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता के मामले पर राष्ट्रपति को एक विशेष रिपोर्ट सौंपने की ज़िम्मेदारी दी गई थी.
प्रीता बंसल ओबामा को उनके कॉलेज के दिनों से जानती हैं और कुछ साझा मित्रों ने उन्हें ओबामा के चुनाव अभियान से जोड़ा. वे न्यूयॉर्क की सॉलिसिटर जनरल के पद पर भी रह चुकी हैं.
चुनाव अभियान में जुटने से पहले वे अमरीका की अलग-अलग यूनिवर्सिटियों में संवैधानिक क़ानून पर लेक्चर देने में व्यस्त थीं.
हरि सेवुगन
हरि सेवुगन के माता-पिता 1960 के दशक में आंध्र प्रदेश से अमरीका जाकर बसे थे. हरि सेवुगन डेमोक्रेट उम्मीदवार बराक ओबामा के सबसे नज़दीकी सलाहकारों में से एक हैं और उनके आधिकारिक प्रवक्ता हैं.
सेवुगन का ताल्लुक़ इलिनॉय प्रांत से है जहाँ से बराक ओबामा सीनेटर रहे हैं. हरि सेवुगन ने क़ानून की पढ़ाई इलिनॉय यूनिवर्सिटी से की है.
उनकी विशेषज्ञता राजनीतिक संगठन के क्षेत्र में मानी जाती है, वे ओबामा के साथ पिछले आठ महीने से प्रवक्ता के तौर पर जुटे हुए हैं, अमरीकी टीवी चैनलों और अख़बारों में वे अक्सर अपने नेता की हिमायत करते दिखाई देते हैं.
ओबामा से जुड़ने से पहले सेवुगन क्रिस डॉड को राष्ट्रपति बनवाने की मुहिम में जुटे हुए थे लेकिन उनका पत्ता कटने के बाद ओबामा ने उन्हें अपनी टीम में शामिल कर लिया.
सेवुगन इसके पहले कई सफल राजनीतिक अभियानों में आगे-आगे रहे हैं, मार्टिन ओ मिली को मेरीलैंड से गवर्नर की दौड़ में जीत दिलाने के बाद से राजनीतिक गलियारों में उनका क़द काफ़ी बढ़ गया.
किशन पु्त्ता
इंडियंस फॉर मैकेन अभियान के आयोजक किशन पुत्ता की उम्र सिर्फ़ 34 साल है. वे कई वर्षों से लॉस एंजेल्स टाइम्स के लिए लिखते रहे हैं.
वे भारतीय अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के लिए भी अमरीका से रिपोर्टें भेजते रहे हैं.
किशन पुत्ता जॉन मेकेन के अभियान से शुरू से जुड़े हुए हैं. वे स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में अमरीकी सेनेट के सलाहकार रह चुके हैं जो इस चुनाव में भी एक बड़ा मुद्दा है.
प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके किशन पुत्ता बॉबी जिंदल के गर्वनर के चुनाव अभियान में भी अग्रणी भूमिका निभा चुके हैं.
नीरा टंडन
नीरा टंडन को अमरीका के अख़बार 'वीमेन बिहाइंड हिलेरी' कहा जाने लगा था, वे हिलेरी क्लिंटन को राष्ट्रपति बनवाने में जी-जान से जुटी थीं लेकिन उनकी उम्मीदवारी वापस लेने के बाद अब वे ओबामा के साथ जुड़ी हैं.
वे ओबामा की घरेलू मामलों की नीति निर्माता टीम की निदेशक हैं. नीरा ने क़ानून की पढ़ाई येल यूनिवर्सिटी से की है.
वे इससे पहले वे अल गोर के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में भी अहम भूमिका निभा चुकी हैं. वे अक्सर कहती हैं कि उन्होंने एक आम भारतीय की कड़ी मेहनत से अपनी जगह बनाई है जिस पर उन्हें गर्व है.
प्रीत जसरानी
परंपरागत रूप से रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करने वाले ओहायो में इस बार काँटे की टक्कर है और यहाँ ओबामा का जीतना ज़रूरी बताया जा रहा है.
ओहायो में 20 इलेक्टोरल कॉलेज वोट हैं, ओहायो की इंडियन अमेरिकन कॉकस की निदेशक प्रीत जसरानी काफ़ी अहम भूमिका निभा रही हैं.
सिंधी परिवार से ताल्लुक़ रखने वाले जसरानी ब्लू स्काई होल्डिंग्स नाम की कंपनी के प्रमुख हैं और भारतीय वोटरों को ओबामा की तरफ़ खींचने में जुटे हुए हैं.