मंगलवार, 07 अक्तूबर, 2008 को 13:26 GMT तक के समाचार
लंदन स्थित अल शार्क़ अल अवस्त अख़बार के मुताबिक सऊदी अरब में अफ़ग़ानिस्तान और तालेबान के बीच बातचीत हुई है.
अख़बार के अनुसार यह बातचीत धार्मिक महीने रमज़ान के आख़िरी दिनों में मक्का में हुई और बातचीत तीन दिनों तक चली.
तालेबान की तरफ़ से पूर्व मंत्रियों और तालेबान नेता मुल्ला उमर के एक सहयोगी ने इस बातचीत में हिस्सा लिया जबकि अफ़ग़ानिस्तान की ओर से सांसद आरिफ़ नूर ज़ी के नेतृत्व में 17 लोग इल बातचीत में शामिल हुए.
ख़बरों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच विभिन्न मुद्दों पर असहमति के बावजूद बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई.
बातचीत का ब्यौरा नहीं
हालांकि अख़बार ने बातचीत का ब्यौरा नहीं दिया है.
ग़ौरतलब है कि अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने सऊदी अरब के अधिकारियों से अपील की थी कि वे तालेबान को बातचीत के लिए राजी करने की कोशिश करें ताकि हिंसा का अंत हो और देश में जारी विवाद का राजनीतिक समाधान ढूँढ़ा जा सके.
तालेबान के साथ पूर्व में सऊदी अरब के अच्छे संबंध रहे हैं. अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासन के दौरान सऊदी अरब के शासकों ने तालेबान को अपना समर्थन दिया था.
लेकिन वर्ष 2001 में अमरीका पर हुए चरमपंथी हमलों के बाद जब तालेबान ओसमा बिन लादेन को सौंपने में असफल रहे तब दोनों के बीच संबंधों में खटास आ गई थी.
उल्लेखनीय है कि अमरीकी रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स ने भी ब्रितानी कमांडर की इस राय का समर्थन किया था कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान और अन्य चरमपंथियों से बात करनी चाहिए.
इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान में ब्रितानी कमांडर ब्रिगेडियर मार्क कार्लटन-स्मिथ ने सुझाव दिया था कि वहाँ संघर्ष ख़त्म करने के लिए ज़रूरी है कि तालेबान और अन्य चरमपंथियों से बात की जाए.