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शुक्रवार, 05 सितंबर, 2008 को 07:25 GMT तक के समाचार

मैकेन ने किया सुधार का वादा

अमरीकी राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉन मैकेन ने सरकार में सुधार लाने का वादा करते हुए कहा है कि वे देश को शांति और उन्नति के रास्ते पर वापस लाएँगे.

अमरीका के मिनेसोटा में रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में अपनी उम्मीदवारी को औपचारिक रुप से स्वीकार करते हुए मैकेन ने परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्धता की बात कही.

अपनी पार्टी के प्रति लोगों का विश्वास जीतने और एक बेहतर देश के लिए संघर्ष की बात करते हुए मैकेन ने टैक्स कम करने और सरकार के ख़र्चों को कम करने का भी वादा किया.

जॉन मैकेन के वादों को खारिज करते हुए उनके प्रतिद्वंद्वी और डेमोक्रैटिक पार्टी के उम्मीदवार बराक ओबामा ने कहा है कि जॉन मैकेन पिछले 26 सालों से 'पुराने' और 'कुछ न करने वाली भीड़' का हिस्सा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि मैकेन की विदेश और आर्थिक नीतियाँ वही हैं जो पहले ही त्रासदीपूर्ण साबित हो चुकी हैं.

जब मैकेन भाषण दे रहे थे तो युद्ध विरोधी लोगों ने इसमें बाधा भी पहुँचाई.

विदेश नीति

अपनी विदेश नीति का बचाव करते हुए मैकेन ने कहा कि उन्होंने ऐसे समय में इराक़ में फ़ौजों की संख्या बढ़ाने का समर्थन किया था जब वह कोई लोकप्रिय क़दम नहीं था, लेकिन वही एक सही क़दम था.

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब आक्रामकता और अंतरराष्ट्रीय अराजकता बढ़ रही हो, अमरीका आँखें मूंदे नहीं रह सकता.

उन्होंने ईरान को आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक बताया और रूस पर लोकतांत्रिक आदर्शों को नकारने का आरोप लगाया.

इसके अलावा मैकेन ने रोज़गार के नए अवसर पैदा करने, शिक्षा का स्तर सुधारने, और तेल के विदेशी स्रोतों पर निर्भरता ख़त्म करके अपने देश में ही ज़्यादा तेल उत्पादन करने का वादा भी किया.

उन्होंने देश की समस्याओं को निपटाने के लिए द्विपक्षीय राजनीति की बात करते हुए कहा, "मैं समस्याओं को सुलझाने के लिए दोनों राजनीतिक दलों के सदस्यों से बार-बार बात करता रहा हूँ और राष्ट्रपति की तरह भी मैं ऐसे ही काम करता रहूँगा."

उन्होंने कहा, "मैं इस देश को आगे बढ़ाने के लिए किसी की ओर भी हाथ बढ़ाने के लिए तैयार हूँ."

"मेरे पास दिखाने के लिए सबूत हैं कि मैं ऐसा करता रहा हूँ लेकिन ओबामा के पास नहीं है."

बीबीसी के संवाददाता एडम ब्रूक्स के अनुसार लोगों को लगता है कि मैकेन के भाषण में न तो वैसा कटाक्ष था जैसा कि ओबामा के भाषण में था और न वैसी कटुता झलक रही थी.