बुधवार, 06 अगस्त, 2008 को 23:17 GMT तक के समाचार
अमरीका और ब्रिटेन का कहना है कि दुनिया की छह बड़ी शक्तियाँ ईरान पर और प्रतिबंध लगाने को सहमत हो गई हैं क्योंकि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं रोक रहा है.
अमरीकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्य और जर्मनी चाहते थे कि ईरान साफ़ जवाब दे ताकि उसे कुछ राहत दी जा सके लेकिन ईरान ने जो पत्र भेजा उसमें कोई आश्वासन नहीं दिया गया है.
फ़्रांस का कहना है कि ईरान ने अपने ऊपर और प्रतिबंध लगाए जाने का विकल्प ख़ुद चुना है.
हालांकि संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत ने कहा है कि अभी भी बातचीत की गुंजाइश है.
अमरीका और ये पाँचों देश चाहते है कि ईरान परमाणु संवर्धन का कार्य रोक दे लेकिन ईरान का कहना है कि यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए हैं और इसलिए वह इसे नहीं रोकेगा.
इस असहमति के चलते संयुक्त राष्ट्र की ओर से ईरान पर कई प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं.
प्रतिबंध
सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्यों और जर्मनी के बीच हुई चर्चा के बाद यह सहमति बनी है. यह चर्चा टेलीफ़ोन पर हुई.
सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्यों में चीन, फ़्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमरीका हैं.
अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोंज़ेलो गैलिओस का कहना था, "अब हम प्रतिबंध की रुपरेखा पर विचार करना शुरु करेंगे."
इन छह देशों ने जून में ईरान से कहा था कि यदि वह परमाणु संवर्धन कार्यक्रम रोक देता है तो उस पर आगे कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा.
इन देशों ने ईरान के साथ दीर्घकालीन सहयोग के लिए बातचीत शुरु करने का आश्वासन भी दिया था.
लेकिन इस हफ़्ते के शुरुआत में ईरान ने जो पत्र भेजा उससे ये देश सहमत नहीं हैं.
इन देशों के अनुसार ईरान ने इस पत्र में आपसी सुलहसफ़ाई की बात कही है.
अमरीका ने जहाँ इसे टालमटोल की नीति कहा है तो ब्रिटेन ने इस पर निराशा व्यक्त की है.
हालांकि ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है लेकिन अमरीका और कुछ यूरोपीय देश मानते हैं कि ईरान परमाणु हथियार बनाने में लगा हुआ है.