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सोमवार, 28 जुलाई, 2008 को 04:54 GMT तक के समाचार

इस्तांबुल में बम धमाके, 17 मारे गए

तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में हुए दो धमाकों में कम से कम 17 लोग मारे गए हैं और 154 घायल हुए हैं. अधिकारियों ने इसे चरमपंथियों का हमला बताया है.

पहला धमाका भीड़ भरे रिहायशी क्षेत्र गंगोरेन में रखे एक कूड़ेदान में हुआ जबकि दूसरा और बड़ा धमाका ऐसी जगह हुआ जहाँ भीड़ जमा थी.

अब तक इन धमाकों की ज़िम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है.

राष्ट्रपति अबदुल्ला ग़ुल ने कहा कि इन धमाकों ने चरमपंथ की निर्दयता और बुरे कामों में लिप्त रहने का लक्ष्य दर्शा दिया है.

धमाकों के बाद वहाँ हड़कंप का मंज़र था और खून से लथपथ लोग भागते हुए दिख रहे थे. टीवी के दृश्यों में दिखाई दिया कि सड़क पर बहुत से लोग घायल अवस्था में पड़े थे और उन्हें एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया जा रहा था.

कूड़ेदान में छिपा बम

इन धमाकों की प्रारंभिक रिपोर्ट संकेत दे रही थीं कि यह गैस का रिसाव हो सकता है लेकिन बाद में इस्तांबुल के गवर्नर मुअम्मेर गुलेर ने कहा कि निश्चित रूप से यह आतंकवादी हमला है जिसमें ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के मारे जाने का लक्ष्य था.

यह धमाके एक भीड़ भरी सड़क पर दस मिनट के अंतर से हुए. द न्यू अंटोलियन न्यूज़पेपर के संपादक इल्नर कैविक ने बीबीसी को बताया कि धमाकों के स्थल पर उस समय क़रीब एक हज़ार लोग मौजूद थे.

पहला धमाका एक बैंक के सामने रखे कू़ड़ेदान में एक छोटा से उपकरण में हुआ और जिसके बाद उस जगह भीड़ जमा हो गई.

इसके बाद दूसरा बम कुछ ही मिनटों के बाद पहले धमाके के स्थल से क़रीब 50 मीटर दूर एक दूसरे कूड़ेदान से फटा.

गुलेर ने कहा कि पुलिस का मानना है कि यह धमाके आत्मघाती नहीं थे. इन्हें रिमोट या टाइमर से संचालित किया गया था.

तुर्की के मीडिया ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि इस हमले में विद्रोही संगठन कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) का निशान मिला है. लगता है कि यह हमला उनके ठिकानों पर चलाए जा रहे तुर्की सेना के प्रमुख ऑपरेशनों की श्रृंखला का बदला लेने के लिए किया गया है.

इस्तांबुल में बीबीसी की सारा रेंसफ़ोर्ड ने बताया कि पीकेके ने पहले भी तुर्की के शहरों में नागरिकों पर हमले किए हैं.

प्रधानमंत्री रेसेप तेयिप एर्दोगन ने कहा कि ऐसे हमले चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए तुर्की के निश्चय को और दृढ़ बनाते हैं.