मंगलवार, 08 जुलाई, 2008 को 20:24 GMT तक के समाचार
अमरीका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी आपत्तियों की कड़ी में ताज़ा दबाव बनाते हुए ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा कर दी है.
अमरीका की ओर से यह प्रतिबंध ऐसे वक़्त में लगाए जा रहे हैं जब ईरान ने भी परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगातार घेरे जाने पर अपना रुख़ सख़्त कर लिया है.
ईरान के सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता आयतुल्ला ख़मेनेई के एक सहयोगी ने कहा है कि अगर परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान पर हमला हुआ तो उनका देश इसराइल और अमरीकी नौसेना पर खाड़ी में हमला करेगा.
अली शिराज़ी ने कहा है, "ईरान पर अमरीका ने एक भी हमला किया तो दुनिया भर में अमरीका के ठिकाने निशाने पर होंगे. फ़ारस की खाड़ी में इसराइली और अमरीकी फ़्लीट पर हमला होगा."
अली शिराज़ी ईरान के रेवुलुशनरी गार्डस में आयतुल्ला ख़मेनेई के प्रतिनिधि हैं.
इस तरह दोनों ही ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तीखी बयानबाज़ी और शब्दों का युद्ध तेज़ हो चुका है.
विवाद
दरअसल, पिछले कुछ बरसों से ईरान का परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा औऱ बहस का मुद्दा बना हुआ है.
अमरीका का कहना है कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से रोक देना चाहिए और किसी भी तरह के परमाणु परीक्षण से बाज आना चाहिए.
पर ईरान इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है. ईरान का कहना है कि परमाणु परीक्षण करना उसका अधिकार है और इस मुद्दे पर किसी के दबाव में आने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है.
ईरान बार बार यह दोहराता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम मानव उपयोगी गतिविधियों और सकारात्मक दिशा में चल रहा है. परमाणु हथियार बनाने की कोई कोशिश नहीं हो रही है.
पर विवाद यहाँ शुरू होता है जब पश्चिमी देश ईरान के इस तर्क को मानने से या तो इनकार कर देते हैं या इसके प्रति अपना अविश्वास व्यक्त करते हैं.
जून में यूरोपीय संघ ने ईरान पर नए सिरे से प्रतिबंध लगाए थे. लेकिन यूरेनियम संवर्धन रोकने के एवज़ में ईरान के सामने नए प्रस्ताव भी रखे गए हैं.
ईरान का तर्क है कि वो बड़े देशों से बातचीत करने के लिए तैयार है लेकिन बातचीत में ईरान के अधिकारों पर भी बात हो.
कुछ दिनों से इस तरह की ख़बरें आ रही हैं कि अमरीका या इसराइल ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमला कर सकते हैं.
पिछले हफ़्ते एक वरिष्ठ अमरीकी सैन्य अधिकारी ने कहा था कि इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान के बाद मध्य पूर्व में नया मोर्चा खोलना अमरीकी सेना के लिए तनावपूर्ण होगा.