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शनिवार, 28 जून, 2008 को 03:28 GMT तक के समाचार

ज़िम्बाब्वे में मतदान पर अफ़सोस

ज़िम्बाब्वे में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए शुक्रवार को फिर से हुए मतदान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अफ़सोसजनक बताया है.

सुरक्षा परिषद का कहना है कि जिस तरह के भय के वातावरण में दोबारा चुनाव करवाए गए हैं, उनकी निष्पक्षता संदिग्ध ही है.

ज़िम्बाब्वे में शुक्रवार को दोबारा राष्ट्रपति पद के लिए मतदान करवाया गया क्योंकि वहाँ मार्च में हुए चुनाव में कोई नतीजा नहीं निकल पाया था.

शुक्रवार को हुए इस चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे एक मात्र उम्मीदवार रहे. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस मतदान के बहिष्कार का आहवान किया था.

हालांकि रॉबर्ट मुगाबे ने इस आहवान को नज़रअंदाज़ करते हुए दोबारा चुनाव करवाए.

विपक्षी पार्टी के उम्मीदवार मॉर्गन चांगिरई ने कुछ दिन पहले अपना नाम वापस ले लिया था क्योंकि उनके कहना था कि उनके समर्थकों के ख़िलाफ़ हिंसा हुई है और इसी के विरोध प्रदर्शन के तौर पर वह राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर हो रहे हैं.

मॉर्गन चांगिरई ने मतदान के दिन को देश के लिए "शर्मनाक" क़रार दिया.

मतदान के दौरान ज़िम्बाब्वे में मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉन सिम्पसन का कहना था कि हालाँकि वहाँ चुनाव की रिपोर्टिंग पर पाबंदी लगी हुई है लेकिन उन्होंने मतदान को इतना डरावना नहीं पाया है क्योंकि लोगों को पता है कि अगर उन्होंने हाथ की स्याही का निशान दिखाकर यह साबित नहीं किया कि उन्होंने मतदान में हिस्सा लिया है तो उन्हें सत्तारूढ़ ज़ानू-पीएफ़ पार्टी से कार्यकर्ताओं के ग़ुस्से का सामना करना पड़ सकता है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इतना सब होने के बावजूद अगर कोई मतदाता विपक्षी नेता मॉर्गन चांगिरई को वोट देने की हिम्मत जुटाता है और मतदाता सूची में उसका नाम है तो उसकी शिनाख़्त छुपी हुई नहीं रहेगी और फिर उसे हमलों से कोई नहीं बचा सकता.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना के बीच बिना किसी प्रतिद्वंद्वी के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने चुनाव में हिस्सेदारी की और अब ज़िम्बॉब्वे के लोगों को नतीजे का इंतज़ार है.