शुक्रवार, 27 जून, 2008 को 09:57 GMT तक के समाचार
ज़िम्बाब्वे में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए शुक्रवार को फिर से चुनाव हो रहा है क्योंकि मार्च में हुए चुनाव में कोई नतीजा नहीं निकल पाया था.
इस चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे एक मात्र उम्मीदवार हैं और मतदान की शुरूआत ख़ासी धीमी होने की ख़बरें मिली हैं.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस मतदान को स्थगित करने का आहवान किया था लेकिन रॉबर्ट मुगाबे ने उसकी अनदेखी करते हुए मतदान कराया है.
रॉबर्ट मुगाबे ने कहा कि उनकी ज़ानू-पीएफ़ पार्टी देश में तब तक शासन करती रहेगी जब तक उसका मानना है कि देश का शासन एक ख़ास तरीके से चलना चाहिए.
विपक्षी पार्टी के उम्मीदवार मॉर्गन चांगिरई ने कुछ दिन पहले अपना नाम वापस ले लिया था क्योंकि उनके कहना था कि उनके समर्थकों के ख़िलाफ़ हिंसा हुई है और इसी के विरोध प्रदर्शन के तौर पर वह राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर हो रहे हैं.
मॉर्गन चांगिरई ने अपने समर्थकों से कहा है कि अगर उन्हें ख़ुद की हिफ़ाज़त करने के लिए मतदान करना पड़े तो वो मतदान ज़रूर करें लेकिन चांगिरई ने मतदान के दिन को देश के लिए "शर्मनाक" क़रार दिया है.
इस बीच आठ विकसित देशों - जी-8 के विदेश मंत्रियों की जापान में एक बैठक हुई है जिसमें उन्होंने कहा है कि वे एक ऐसी ज़िम्बाब्वे सरकार की वैधता को स्वीकार नहीं कर सकते "जो ज़िम्बाब्वे के लोगों की इच्छा को प्रतिबिंबित नहीं करती."
ज़िम्बाब्वे में मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉन सिम्पसन का कहना है कि हालाँकि वहाँ चुनाव की रिपोर्टिंग पर पाबंदी लगी हुई है लेकिन उन्होंने मतदान को इतना डरावना नहीं पाया है क्योंकि लोगों को पता है कि अगर उन्होंने हाथ की स्याही का निशान दिखाकर यह साबित नहीं किया कि उन्होंने मतदान में हिस्सा लिया है तो उन्हें सत्तारूढ़ ज़ानू-पीएफ़ पार्टी से कार्यकर्ताओं के ग़ुस्से का सामना करना पड़ सकता है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इतना सब होने के बावजूद अगर कोई मतदाता विपक्षी नेता मॉर्गन चांगिरई को वोट देने की हिम्मत जुटाता है और मतदाता सूची में उसका नाम है तो उसकी शिनाख़्त छुपी हुई नहीं रहेगी और फिर उसे हमलों से कोई नहीं बचा सकता.
सरकार अख़बार हेराल्ड का कहना है, शुक्रवार को होने वाले चुनाव में "भारी मतदान" होने की संभावना है लेकिन हरारे और एक अन्य शहर बुलावायो में मौजूद पत्रकारों ने बताया है कि मतदान धीमी गति से शुरू हुआ, ख़ासतौर से पहले के दौर में मतदान के मुक़ाबले.