गुरुवार, 26 जून, 2008 को 17:24 GMT तक के समाचार
कूटनयिकों का कहना है कि लंबे इंतज़ार के बाद उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी जानकारियाँ चीन कौ सौंप दी है.
अमरीका ने इस पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है. राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि वो इस क़दम का स्वागत करते हैं लेकिन उत्तर कोरिया को लेकर अमरीका की 'गंभीर चिंताएँ' बरकरार है.
उन्होंने कहा कि वो 45 दिनों के भीतर उत्तर कोरिया को आतंकवाद समर्थक देशों की सूची से बाहर करने की अपनी इच्छा के बारे में अमरीकी कॉंग्रेस को बताने जा रहे हैं बशर्ते घोषणापत्र में अपेक्षित सूचनाएँ दी गई हों.
उत्तर कोरिया ने जो परमाणु कार्यक्रम के बारे में जो घोषणापत्र दिया है उसमें प्लूटोनियम संवर्धन की कोशिशों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है.
लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि घोषणापत्र में परमाणु हथियारों या कथित यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम के बारे में गूढ़ जानकारियाँ मिलने की संभावना कम ही है.
'हमें कोई भ्रम नहीं'
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉंफ़्रेस में कहा, "अमरीका को उत्तर कोरिया में जो सरकार है उसके बारे में कोई भ्रम नहीं है."
उनका कहना था, "हम उत्तर कोरिया में मानवाधिकार हनन, यूरेनियम संवर्धन गतिविधियाँ, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और पड़ोसी देशों को उससे होने वाले ख़तरों को लेकर अभी भी बेहद चिंतित हैं."
छह देशों के वार्ताकार उत्तर कोरिया को इस बात के लिए राज़ी कराने में लगे हुए थे कि वो निरस्त्रीकरण के रास्ते पर चले जिसके बदले उसे कूटनयिक और आर्थिक सहायता दी जाएगी.
हालाँकि अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्टीफन हैडली ने कहा, "उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबंध में जो ढील दी गई है उसका दायरा बहुत छोटा है. उत्तर कोरिया अभी भी सबसे ज़्यादा प्रतिबंध झेलने वाले देशों में शामिल है."
हैडली ने चेतावनी दी कि अगर उत्तर कोरिया उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा तो ये प्रतिबंध फिर लगाए जा सकते हैं.