बुधवार, 25 जून, 2008 को 10:19 GMT तक के समाचार
ज़िम्बाब्वे के चुनाव को लेकर गहराते संकट का हल निकलने के लिए दक्षिण अफ्रीकी क्षेत्रीय संगठन के नेता एक आपात बैठक कर रहे हैं.
दक्षिण अफ्रीकी देशो की ये बैठक स्वाज़ीलैंड में हो रही है. स्वाज़ीलैंड के विदेश मंत्री मतेंदाले ड्लोमिनी ने बीबीसी को बताया कि संगठन ज़िम्बाब्वे की निंदा करने की जगह उन्हें सलाह दे सकता है.
ज़िम्बाब्वे में विपक्ष को उम्मीद है कि उसके पड़ोसी अफ्रीकी देश ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे पर दबाव डालेंगे.
इसके पहले अमरीका ने कहा था कि वो ज़िम्बाब्वे में शुक्रवार को होने वाले चुनावों को मान्यता नहीं देगा.
अमरीकी विदेश विभाग में उपमंत्री जेंदाई फ्रेजर ने बीबीसी से कहा कि विपक्ष के खिलाफ़ जारी मौजूदा हिंसा के बीच रॉबर्ट मुगाबे जीत का दावा नहीं कर सकते.
फ्रेजर ने कहा कि वॉशिंगटन मौजूदा हालात में शुक्रवार को होने वाले चुनावों को मान्यता नहीं दे सकता क्योंकि विपक्षी दल मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज (एमडीसी) के खिलाफ़ हिंसा करके उन्हें चुनावों से हटाया गया है.
“लोग केवल इसलिए हिंसा का शिकार हो रहे हैं क्योंकि वो अपने नेता के पक्ष में अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहते हैं”.
हल
ज़िम्बाब्वे में विपक्ष के नेता मॉर्गन चांगिराई ने जारी कूटनीतिक प्रक्रिया को असरहीन बताया है. उन्होंने देश में अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिकों को तैनात करने कि मांग की है.
ब्रितानी अखबार 'गार्डियन' में चांगिराई ने लिखा है कि ज़िम्बाब्वे में प्रजातंत्र की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की ज़रूरत है.
कुछ दिन पहले चांगिराई ने देश में चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के बाद चुनाव न लड़ने की घोषणा की थी.
चांगिराई के नेतृत्व वाली एमडीसी ने आरोप लगाया था कि उसके 86 समर्थक मार डाले गए हैं और दो लाख अन्य को उनके घर छोड़ का भागने पर मजबूर होना पड़ा है.
बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विरोध के बावजूद ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे शुक्रवार को देश में चुनाव कराने पर अड़े हुए हैं.