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मंगलवार, 10 जून, 2008 को 03:00 GMT तक के समाचार

रेणु अगाल
बीबीसी संवाददाता, दक्षिण अफ़्रीका से

सोने के शहर जोहानेसबर्ग में....

दक्षिण अफ़्रीका के सबसे बड़े शहर जोहानेसबर्ग को सोने का शहर भी कहा जाता है क्योंकि इस शहर की किस्मत सोने की खदानों ने चमकाई और अफ़्रीका के सबसे विकसित शहर का इसे गौरव दिया.

जोहानेसबर्ग में घुसते ही आपको लगता है कि आप इंग्लैंड आ गए हैं. वैसे ही घर, हरी-भरी घास, चौड़ी सड़कें, यानी कुल मिलाकर एक विकसित देश का सा आभास.

वर्ष 1880 में यहाँ सोने की खदानें मिली और यह एक छोटे से कस्बे से अफ़्रीका के सबसे विकसित शहर में तब्दील हो गया.

सोने की खदान जहाँ संपन्नता लाई वहीं इस पर कब्ज़े की होड़ भी. आज शहर के अंदर सोने की खदानें पर्यटन का हिस्सा बन गई है.

शहर ने काले, खदानों में काम करने वालों और गोरे अमीर खदान मालिकों के बीच बढ़ती खाई भी देखी. शहर गोरे और काले हिस्सों में बाँट दिया गया.

रंगभेद की मार

आज भी साउथ वेस्टर्न टाउनशिप और सोमेटो जैसा इलाक़ा है जहाँ ग़रीब काले अफ़्रीकी रहते हैं.

अमीर मुख्यतः गोरे अफ़्रीकी शहर के बाहरी इलाक़ों में बड़े-बड़े हवेलीनुमा घरों में रहते हैं.

ये घर किसी किले से कम नहीं. कटीली बाड़, बिजली के तार और अलार्म हर घर को सुरक्षा देता है और शहर में बढ़ते अपराध की ओर भी संकेत करता है.

शहर में कई कैफ़े, रेस्तरां और बार हैं जहाँ ऐसा लगता है कि पैसे की कोई कमी नहीं.

तो वहीं सड़क के किनारे हाथ में तख़्तियाँ लिए औरतें, बच्चे, युवा दिख जाते हैं. तख़्तियाँ कहती हैं- मैं ग़रीब हूँ, मेरी मदद कीजिए.

हाल में पड़ोसी देश ज़िंम्बाब्बे से यहाँ पहुँचे शरणार्थियों से तनाव बढ़ा है.

काले, कालों को मारने लगे हैं. अपने अपनों के दुश्मन बन गए हैं. विदेशी इसके निशाना बने. यहाँ तक कि भारतीय व्यापारियों ने भी इसे महसूस किया.

भारत भाई फ़ोर्डसबर्ग नामक भारतीय बहुल बाज़ार में एक रेस्तरां चलाते हैं.

जी, आपने ठीक पढ़ा जोहानेसबर्ग में ऐसे इलाक़े हैं जहाँ भारतीय मूल के लोग रहते हैं क्योंकि रंगभेद के दिनों में काले के साथ-साथ भारतीय मूल के लोगों को भी दूसरे दर्जे का नागरकि माना जाता था.

हालांकि आज यहाँ भारतीय मूल के लोग आर्थिक रूप से संपन्न हैं और दक्षिण अफ़्रीकी समाज के अभिन्न अंग हैं.

दक्षिण अफ़्रीका, ब्राजील और भारत की तरह तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है. यहाँ भी ग़रीबी, शिक्षा का अभाव और एचआईवी एड्स जैसी समस्याएँ हैं.

इन समस्याओं की वजह से दक्षिण अफ़्रीका के कद्दावर नेता नेल्सन मंडेला के इंद्रधनुषी राष्ट्र या रेन बो नेशन के सपने टूटने के कगार पर पहुँच रहा है.