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शनिवार, 24 मई, 2008 को 11:55 GMT तक के समाचार

चांगिराई दो महीने बाद ज़िम्बाब्वे लौटे

ज़िम्बाब्वे के विपक्षी नेता मॉर्गन चांगिराई कई सप्ताह विदेशों में गुज़ारने के बाद हरारे पहुँच गए हैं जहाँ वह राष्ट्रपति के चुनाव में हिस्सा लेने के अभियान की शुरूआत करेंगे.

समाचार एजेंसियों ने ख़बर दी है कि ज़िम्बाब्वे में विपक्षी मूवमेंट फ़ॉर डेमोक्रेटिक चेंज यानी एमडीसी के नेता मॉर्गन चांगिराई ने स्वदेश वापसी पर कहा है, "स्वदेश लौटकर अच्छा लग रहा है."

मॉर्गन चांगिराई कुछ सप्ताह से दक्षिण अफ्रीका में रह रहे थे.

मॉर्गन चांगिराई को पिछले सप्ताहांत स्वदेश लौटना था लेकिन कुछ ऐसी ख़बरें फैल गई थीं कि ज़िम्बाब्वे की सेना ने उनकी हत्या की योजना बना ली थी इस वजह से चेंगराई की वापसी में देरी हुई है.

उधर सत्तारूढ़ पार्टी ने विपक्षी पार्टी के इन आरोपों को बिल्कुल निराधार बताया है.

पर्यवेक्षकों का कहना है कि 27 जून को दूसरे दौर के मतदान के भी निष्पक्ष होने की संभावना कम ही है.

पुलिस हमले

ज़िम्बाब्वे के विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि सैकड़ों विपक्षी कार्यकर्ताओं को पीटा गया है और 29 मार्च को हुए पहले दौर के मतदान के बाद हुई हिंसा में कम से कम 40 लोग मारे जा चुके हैं.

जोहनसबर्ग में मौजूद बीबीसी संवाददाता पीटर बिल्स का कहना है कि मॉर्गन चांगिराई ने शनिवार को स्वदेश वापसी के बाद हरारे के एक निजी अस्पताल में उन लोगों से मुलाक़ात की है जो राजनीतिक हिंसा में घायल होने के बाद इलाज करा रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ज़िम्बाब्वे की सरकार ने विपक्षी एमडीसी के समर्थकों को परेशान करने का अभियान चलाया हुआ है जिसकी वजह से बहुत से लोगों को अस्पतालों में भर्ती होना पड़ रहा है और अस्पतालों में जगह की कमी हो रही है.

राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे की ज़ानू पीएफ़ पार्टी ने ऐसी हिंसक घटनाओं में सरकार का कोई हाथ होने से इनकार किया है और कहा है कि पश्चिमी देश ज़िम्बाब्वे को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.

वर्ष 2007 में मॉर्गन चांगिराई पर पुलिस ने हमला किया था जिसके बाद उनका भी अस्पताल में कुछ दिन तक इलाज हुआ था.

उधर रॉबर्ट मुगाबे ने आरोप लगाया है कि एमडीसी पहले दौर का मतदान होने के बाद हिंसक गतिविधियों में शामिल रही है.

मॉर्गन चांगिराई पिछले क़रीब दो महीने तक ज़िम्बाब्वे से बाहर रहे हैं और इस दौरान उनका ज़्यादा समय दक्षिण अफ्रीका में बीता है. इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने की कोशिश की है.

ज़िम्बाब्वे के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार एमडीसी नेता मॉर्गन चांगिराई ने नतीजों में जीत हासिल की थी लेकिन जीत का अंतर इतना बड़ा नहीं था कि वह राष्ट्रपति मुगाबे को पूरी तरह मैदान से हटा सकें.

ज़िम्बाब्वे के चुनाव आयोग ने कहा है कि मॉर्गन चेंगराई को 47.9 प्रतिशत वोट मिले जबकि मुगाबे को 43.2 प्रतिशत मत हासिल हुए.