शनिवार, 17 मई, 2008 को 09:07 GMT तक के समाचार
ब्रितानी प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन और संयुक्त राष्ट्र में फ़्रांसीसी राजदूत ने बर्मा में तूफ़ान से प्रभावित लोगों तक अंतरराष्ट्रीय मदद पहुँचाने की अनुमति न देने के लिए बर्मा की सैन्य सरकार की कड़ी आलोचना की है.
आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक बर्मा में तूफ़ान में मरने वालों की संख्या 78 हज़ार हो गई है जबकि 56 हज़ार अन्य लोग लापता हैं. इससे पहले सरकार ने मरने वालों की संख्या 43 हज़ार बताई थी.
बीबीसी के साथ बातचीत में ब्रितानी प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कहा कि एक प्राकृतिक आपदा को बर्मा के जनरलों की लापरवाही ने मनुष्यों की बनाई आपदा में तबदील कर दिया गया है.
लाखों की जान का सवाल
उनका कहना था, "वहाँ पैदा हुई स्थिति की ज़िम्मेदारी बर्मा के शासकों की है और उन्हें इसका उत्तर देना चाहिए."
उधर संयुक्त राष्ट्र में फ़्रांस के राजदूत याँ-मॉरिस रिपर्ट ने आरोप लगाया है कि बर्मा के जनरल मानवता के ख़िलाफ़ अपराध करने के काफ़ी क़रीब आ गए हैं.
फ़्रांस के राजदूत याँ-मॉरिस रिपर्ट का कहना था, "लाखों लोगों की जान जोख़िम में है. हमारा मानना है कि बर्मा की सरकार की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है कि वह सीमाएँ खोले ताकि अंतरराष्ट्रीय मदद प्रभावित लोगों तक पहुँच पाए."
फ़ांस और अमरीका ने पीड़ितों के लिए राहत सामग्री से लदे समुद्री जहाज़ भेजे हैं जो बर्मा के तट पर खड़े हैं. फ़्रांस की 1500 टन की खाद्य सामग्री और दवाएँ पीड़ितों तक पहुँच नहीं पाई है.
अब तक सरकार ने इरावाडी प्रायद्वीप के प्रभावित इलाक़ो में समुद्र के ज़रिए सीधी राहत सामग्री पहुँचाने की इजाज़त नहीं दी है.