मंगलवार, 13 मई, 2008 को 06:45 GMT तक के समाचार
दुजियांग्यान से निक मैकी
मैं यहाँ आधी रात को पहुँचा था. तब यहाँ घोर अंधकार छाया हुआ था.
शहर में बिजली का नामोनिशान नहीं था लेकिन इसके बावजूद यह साफ़ दिखाई दे रहा था कि ज़्यादातर इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं और कुछ इमारतें पूरी तरह गिर गई थीं.
बहुत से मज़दूर और सिपाही बचाव और राहत कार्य में लगे हुए थे. वह गिरी हुई इमारतों का मलबा साफ़ कर रहे थे ताकि पता चल पाए कि मलबे के नीचे लोग दो नहीं दबे हुए हैं.
इसके अलावा वहाँ सैकड़ों- हज़ारों लोग बाहर सड़कों पर प्लास्टिक की चादरों के साए में सोए हुए थे क्योंकि पूरी रात भीषण बरसात चलती रही थी.
स्पष्ट है कि बरसात से दिन में होने वाले राहत कार्यों में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.
एम्बुलेंस और टैक्सी
इस बुरे मौसम ने बचाव टीम के लिए उन इलाकों में जाना और भी मुश्किल बना दिया है जो बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.
किस्मत से चेंगदु से दुजियांग्यान जाने वाला मुख्य राजमार्ग का हाल इतना बुरा नहीं था.
टैक्सियाँ और एम्बुलेंस लोगों को बड़े शहरों तक लाने और ले जाने में लगी हुई थीं.
आप दुजिंग्यान तक तो पहुँच सकते थे लेकिन इससे भी दूरस्थ इलाकों में पहुँचना बहुत मुश्किल काम था. उन रास्तों की सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, इसलिए यह काम सेना को ही करना होगा.
बचाव टीम उन लोगों को बचाने की कोशिश कर रही थी जो फंसे हुए थे और जिन्हें मदद की ज़रूरत थी - सबसे ज़्यादा ज़रूरी लोगों को बचाना था.
इस सबके अलावा यह भी चिंता का विषय था कि कौन कैसे सो रहा है क्योंकि ऐसे मौसम में सड़कों पर सोने से बूढ़े और बच्चे ख़ासतौर पर जल्दी ही बीमार पड़ सकते हैं.
दोबारा पड़े झटके
कुछ दस मिनटों पहले जब मैं पेट्रोल स्टेशन पर था तब भूकंप के कुछ और झटके महसूस हुए. हालाँकि बहुत सारे पेट्रोल के साथ यह जगह इन झटकों को महसूस करने के लिए कोई अच्छी जगह नहीं थी. लेकिन पिछले तीन घंटों में मैंने तीन बार ऐसे झटके महसूस किए.
वहाँ राहत कार्य में पुलिस लगी हुई थी, सेना लगी हुई थी और बहुत सी नागरिक एजेंसी भी लगी हुई थीं. सभी लोग एकजुट होकर काम में लगे थे लेकिन अब यह तो समय ही बताएगा कि यह संगठित काम कितना प्रभावशाली साबित होगा.
सिचुआन प्रांत के लोग कमाल के हैं. लोगों में शांति है और यहाँ तक कि सड़कों पर इन ख़राब हालात में सोने के बावजूद लोगों के बीच हास-परिहास और ठठ्ठा भी देखने को मिल रहा है.
लेकिन जैसे ही भूकंप का कोई झटका महसूस होता है, लोग चौकस होकर इमारतों से जितनी दूर जा सकते थे, जाने की कोशिश करते हैं...