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रविवार, 11 मई, 2008 को 12:36 GMT तक के समाचार

बर्मा में सरकार का रुख़ नरम हुआ

बर्मा में पहले के मुकाबले तूफ़ान प्रभावित लोगों तक अब ज़्यादा राहत सामग्री पहुँचना शुरू हो गई है. संकेत मिल रहे हैं कि सैन्य शासन कुछ नरमी बरत रहा है.

तूफ़ान से प्रभावित लोगों की मदद करने में विदेशी सहायत लेने में बर्मा सरकार अब तक पूरी तरह राज़ी नहीं हुई थी.

विश्व खाद्य कार्यक्रम को 38 टन राहत सामग्री बाँटने की अनुमति दी गई है. ये सामान रंगून हवाईअड्डे पर अटका पड़ा था.

कई एजेंसियों ने भी बताया है कि उनके काम में प्रगति हो रही है.हालांकि उनका कहना है कि जो राहत सामग्री पहुँच रही है वो नाकाफ़ी है.

ऑक्सफ़ैम के मुताबिक पानी और साफ़-सफ़ाई के बगैर तूफ़ान से मरने वालों की संख्या एक लाख से बढ़कर डेढ़ लाख हो सकती है.

सकारात्मक संकेत

आठ दिन पहले आए नर्गिस तूफ़ान के कारण मची तबाही के बाद अब बचे हुए लोग शिविरों में इकट्ठा होना शुरू हो गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने 18 करोड़ 70 लाख डॉलर की मदद राशि जुटाने की अपील की है. उसका कहना है कि लोगों को जल्द से जल्द खाने, रहने की जगह और चिकित्सिय मदद की ज़रूरत है.

माना जा रहा है कि राहत सामग्री लिए अमरीका का पहला विमान सोमवार को पहुँचेगा.

अभी तक चीन,थाईलैंड और भारत जैसे देशों से ही राहत सामग्री आई है.

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि अभी तक केवल एक चौथाई लोगों तक ही मदद पहुँची है.

हालांकि संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि बर्मा में अधिकारियों की ओर से अब सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं.

बर्मा में तीन मई को भीषण तूफ़ान आया था.

इस बीच बर्मा के टेलीवीज़न का कहना है कि शनिवार को हुए जनमत संग्रह में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया.

बर्मा के ज़्यादातर हिस्से में शनिवार को जनमत संग्रह हुआ था हालांकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने अपील की थी कि तूफ़ान के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए इसे टाल दिया जाए.

बर्मा सरकार का तर्क है कि जनमत संग्रह से लोकतंत्र का रास्त बनेगा लेकिन विपक्ष का कहना है कि ये सेना की पकड़ और मज़बूत करेगा.