गुरुवार, 08 मई, 2008 को 07:15 GMT तक के समाचार
जोनाथन मार्कस
बीबीसी कूटनीतिक संवाददाता
गुरुवार आठ मई को इसराइल अपनी स्थापना की साठवीं सालगिरह मना रहा है. इसराइल का जन्म वर्ष 1948 में एक यहूदी देश के रूप में हुआ था.
देश में अनेक जगह इस मौक़े पर जश्न मनाया जा रहा है. बुधवार को इसराइली नागरिक येरुशलम की सड़कों पर उतर आए और उन्होंने पटाखे चलाए. गुरुवार को तेल अवीव में आतिशबाज़ी का प्रदर्शन होगा.
बुधवार को येरुशलम के माउंट हर्ज़ल मेमोरियल में शाम से जश्न शुरु हो गया था और सैनिकों की उपस्थिति और कड़ी सुरक्षा के बीच इसराइल का झंडा लहराया गया.
दूसरे विश्व युद्ध के बाद स्थापना
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिटलर के हाथों यूरोप के लाखों यहूदी मारे गए थे. युद्द ख़त्म होने के बाद यहूदियों के लिए नया देश स्थापित किया गया और इसे इसराइल नाम दिया गया.
इसराइल एक क्षेत्रीय फ़ौजी शक्ति है जिसकी अर्थव्यवस्था बेहद मज़बूत है. लेकिन साठ साल के बाद भी इसराइल असुरक्षा की भावना से जूझ रहा है.
साठ साल बाद इसराइल एक ‘सामान्य’ देश बनने की राह पर अग्रसर है. आज का इसराइल एक मज़बूत ज़मीन पर है.
यहूदियों के मन में सदियों से चाह थी कि वे 'अपनी प्राचीन भूमि' पर जाएँ और उन्होंने ऐसे देश का सपना देखा था जो उनके लिए हो.
इसराइल का गठन
लेकिन आधुनिक इसराइल का गठन एक राजनीतिक आंदोलन का नतीजा है जिसे 'ज़ायोनिज़म' के नाम से जाना जाता है और जो मध्य यूरोप में उन्नीसवीं सदी में शुरू हुआ.
इस आंदोलन का मानना था कि यहूदी राष्ट्रवाद ही उनके दुखों का एकमात्र जवाब रह गया था. इसका एक कारण इटली और जर्मनी जैसे देशों का उदय भी था.
वर्ष 1948 के बाद इसराइली राष्ट्रवादियों और फ़लस्तीनी राष्ट्रवादियों के बाच झड़पें शुरु हो गईं.
पिछले साठ सालों में मध्य पूर्व में जो कुछ हुआ, ये इसी संघर्ष का नतीजा है.
आज भी ऐसे लोग हैं जो इसराइल की स्थापना पर सवाल उठाते हैं, लेकिन सच तो यह है कि इसराइल आज पहले से ज़्यादा सुरक्षित है.
आज हर तरह के सवाल उठ रहे हैं कि इसराइल किस तरह का समाज बन रहा है?
इसराइल में रहने वाले अरबी शहरियों के राजनीतिक अधिकार का मुद्दा है जो फ़िलिस्तीनियों के साथ संघर्ष से जुड़ गया है
लेकिन इसके अलावा भी कई मुद्दे हैं, जैसे रूढ़िवादी यहूदियों और धर्मनिर्पेक्ष इसराइलियों के बीच का संघर्ष.
किसी भी देश के इतिहास में साठ साल का वक्त कोई बहुत ज़्यादा समय नहीं होता है.
आधुनिक इसराइल का मूल विरोधाभास ये है कि इसे एक आम देश में पाए जाने वाली समस्याओं से तो जूझना ही है, साथ ही इसराइल के जन्म की वजह से जो समस्याएँ पैदा हुई, उनसे भी इसराइल को निपटना पड़ेगा.