शनिवार, 03 मई, 2008 को 05:32 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य सलाहकार ने बायो ईंधन पर निवेश को रोकने की अपील करते हुए कहा है कि इस नीति को आँख मूंदकर नहीं अपनाना चाहिए.
उनका कहना है कि ऐसा करना 'ग़ैरज़िम्मेदाराना' होगा.
ओलिवर डी स्कटर चाहते हैं कि ऐसे निवेशकों पर रोक लगाई जानी चाहिए जो खाद्यान्न की क़ीमतें बढ़ाना चाहते हैं.
संयुक्त राष्ट्र के इस अधिकारी ने खाद्यान्न संकट को ख़ामोश सूनामी की संज्ञा देते हुए कहा कि इससे दुनिया का दस करोड़ ग़रीबों पर ख़तरा मंडरा रहा है.
माना जाता है कि खाद्य उपजों का इथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन की तरह उपयोग करने के कारण दुनिया भर में खाद्यान्न की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है.
न्यूयॉर्क में बीबीसी की संवाददाता लौरा ट्रेवेल्यन का कहना है कि हालांकि ओलिवर डी स्कटर के तेवर उतने तीखे नहीं है जितने कि उनके पूर्ववर्ती अधिकारी जीन ज़िएगलर के थे.
उल्लेखनीय है कि ज़िएगलर ने बायो ईंधन की निंदा करते हुए इसे 'मानवता के ख़िलाफ़ अपराध' क़रार दिया था और इस पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की माँग की थी.
संकट
हालांकि 'भोजन का अधिकार' पर जारी नई रिपोर्ट में यह ज़रूर कहा गया है कि बायो-ईंधन को लेकर अमरीका और यूरोप ने जो लक्ष्य निर्धारित किए हैं वो अव्यावहारिक हैं.
फ़्रांस के ले मॉन्द को दिए गए एक साक्षात्कार में ओलिवर डी स्कटर ने कहा, "अमरीका और यूरोप में बायो ईंधन के उत्पादन का जो महात्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है वह अव्यावहारिक है."
उन्होंने कहा, "मैं तत्काल इस क्षेत्र में निवेश पर रोक लगाने की अपील कर रहा हूँ."
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी स्कटर ने कहा, "बायो ईंधन की जो होड़ दिखाई पड़ रही है वह एक घोटाला है जिससे एक छोटे गुट हो ही फ़ायदा होना है."
खाद्यान्न संकट पर चर्चा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की विशेष बैठक बुलाए जाने की माँग करते हुए उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि खाद्यान्न पर वायदा बाज़ार के आधार पर किए जाने वाले निवेश पर किसी तरह रोक लगाई जा सके.
उन्होंने कहा कि इसी तरह के निवेश के कारण पिछले दिनों गेहूँ की क़ीमतें बढ़ी हैं.
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में बेल्जियम में अंतरराष्ट्रीय क़ानून के प्रोफ़ेसर ने कहा है कि पिछले महीने खाद्यान्न की क़ीमतों को लेकर जो दंगा हुआ अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसका अनुमान तक नहीं लगा पाया था और यह अक्षम्य है.
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि जब शेयर बाज़ार नीचे जा रहे थे तो तय था कि अब निवेशक खाद्यान्न बाज़ार की ओर आएँगे, लेकिन इस पर किसी तरह के नियंत्रण की कोशिश नहीं की गई.