शुक्रवार, 02 मई, 2008 को 11:09 GMT तक के समाचार
मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया में मध्यस्थता कर रहे संयुक्त राष्ट्र, अमरीका, यूरोपीय संघ और रूस ने कहा है कि पश्चिमी तट और ग़ज़ा की स्थिति में सुधार की तुरंत आवश्यकता है.
चारों पक्षों ने अरब देशों से अपील की कि वे फ़लस्तीनियों को सहायता देने का अपना वादा पूरा करें.
अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि अरब देशों ने पिछले साल दिसंबर में जो वादा किया था उसका पाँचवाँ हिस्सा ही अभी तक दिया गया है.
लंदन में हुई बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान-की-मून ने कहा है कि फ़लस्तीनी इलाक़ों में राजनीतिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है.
अपील
उन्होंने इसराइल से अपील की कि वह पश्चिमी तट में अपनी बस्तियों को बढ़ाना बंद करे. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने यह भी कहा कि चरमपंथ से निपटने के लिए फ़लस्तीनी प्रशासन को भी काफ़ी कुछ करना चाहिए.
इस बीच अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने फ़लस्तीनी क्षेत्रों की सहायता का वादा पूरा करने के लिए अरब देशों से अपील की. लंदन की बैठक में फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री सलाम फ़यद भी शामिल हुए.
उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनी इलाक़ों में वित्तीय सहायता महत्वपूर्ण है लेकिन सिर्फ़ आर्थिक साधनों से ही वहाँ की समस्या का समाधान नहीं निकलेगा.
मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया में मध्यस्थता कर रहे चारों पक्षों ने हिंसा की घटनाओं की निंदा की और कहा कि इसराइल और फ़लस्तीनी प्रशासन दोनों इस पर क़ाबू करने की कोशिश करें.
रुकावट
बैठक में ग़ज़ा की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई और अपील की कि इलाक़े में आवश्यक चीज़ों की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए. ग़ज़ा में हमास के नियंत्रण के बाद से ही इसराइल ने कई तरह की पाबंदी लगा रखी है.
इस कारण वहाँ अक्सर खाने-पीने की सामान और ईंधन की कमी रहती है. अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने अरब देशों से कहा कि वे पेरिस सम्मेलन में किए गए वादे को पूरा करें.
लंदन में हुई बैठक के बाद उन्होंने कहा, "अगर आपने वादा किया है तो उसे पूरा करना चाहिए." अमरीकी अधिकारियों के मुताबिक़ अरब देशों ने 71 करोड़ 70 लाख डॉलर की सहायता का वादा किया था लेकिन अभी तक उन्होंने सिर्फ़ 15 करोड़ 30 लाख डॉलर की ही सहायता दी है.
अमरीका के नेतृत्व में ये शांति वार्ता पिछले साल शुरू हुई थी. इस बातचीत का उद्देश्य इस साल के आख़िर तक दो राष्ट्रों का गठन करके मसले का हल निकालना है लेकिन इस मामले पर काफ़ी कम प्रगति हो पाई है.