गुरुवार, 24 अप्रैल, 2008 को 13:52 GMT तक के समाचार
इराक़ में अधिकारियों ने कहा है कि सद्दाम हुसैन के शासनकाल के दौरान उपप्रधानमंत्री रह चुके तारिक़ अज़ीज़ और कुछ अन्य अधिकारियों पर कुछ व्यापारियों की मौत के सिलसिले में मुक़दमा चलाने की तैयारियाँ की जा रही हैं.
अधिकारियों के अनुसार तारिक़ अज़ीज़ 29 अप्रैल को अदालत में पेश होंगे. तारिक़ अज़ीज़ के अलावा जिन अन्य अधिकारियों पर मुक़दमा चलाया जाएगा उनमें सद्दाम हुसैन के सौतेले भाई और आंतरिक मामलों के पूर्व मंत्री वतबान इब्राहीम अल हसन भी शामिल हैं.
इन लोगों पर आरोप है कि ये 1992 में 40 व्यापारियों के एक दल की मौत के लिए ज़िम्मेदार थे. उन व्यापारियों को गिरफ़्तार किया गया था और आरोप लगाया गया था कि उन्होंने खाद्य पदार्थों में गड़बड़ी की थी.
यह घटना ऐसे समय में हुई थी जब इराक़ पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए थे. इन व्यापारियों को गिरफ़्तार करने के कुछ ही घंटे बाद मौत के घाट उतार दिया गया था.
समाचार एजेंसी एएफ़पी ने कहा है कि जिन अन्य अधिकारियों पर साथ-साथ मुक़दमा चलाया जाएगा उनमें अली हसन अल माजिद उर्फ़ कैमिकल अली भी शामिल हैं.
अली हसन अल माजिद पर 1980 के एक मामले में पहले से ही मौत की सज़ा की तलवार लटक रही है. आरोप है कि 1980 में कुर्दों के ख़िलाफ़ एक कथित सरकारी अभियान में हज़ारों कुर्द मारे गए थे और उस अभियान को सद्दाम हुसैन के आदेशों पर अली हसन अल माजिद ने अंजाम चलाया था.
इन मुक़दमों की सुनवाई जज रऊफ़ रशीद अब्दुल रहमान अध्यक्षता करेंगे जो इराक़ी कुर्द हैं. रऊफ़ वही जज हैं जिन्होंने सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा सुनाई थी.
इराक़ी हाई ट्राइब्यूनल की स्थापना सद्दाम हुसैन शासन के अनेक अधिकारियों और मंत्रियों पर मुक़दमा चलाने के लिए की गई थी.
ग़ौरतलब है कि सद्दाम हुसैन को दिसंबर 2006 में फाँसी दे दी गई थी. उन्हें 1982 में 148 शिया मुसलमानों को मारने के आरोप में यह सज़ा दी गई थी. उन पर मानवता के ख़िलाफ़ अपराध के लिए मुक़दमा चलाया गया था.
1982 में सद्दाम हुसैन पर एक जानलेवा हमला हुआ था और सरकार का आरोप था कि जिन शिया मुसलमानों को मौत की सज़ा दी गई वे सद्दाम हुसैन पर हुए उस हमले के लिए ज़िम्मेदार थे.