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मंगलवार, 22 अप्रैल, 2008 को 21:24 GMT तक के समाचार

शिया कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ संघर्ष जारी

इराक़ी शहर बसरा में शिया कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ इराक़ी सेना का अभियान जारी है और इसमें इराक़ी सेना के साथ विदेशी सेना भी है.

पश्चिमी सेना के सूत्रों के मुताबिक अमरीका और ब्रिटेन की विशेष सेना टुकड़ियाँ इराक़ी सेना के इस अभियान में मदद कर रही हैं.

यह भी बताया गया कि ताज़ा सैनिक अभियान का उद्देश्य कट्टरपंथी शिया लड़ाकों की सेना, मेहदी आर्मी के कुछ बड़े पदाधिकारियों और शिया लड़ाकों को हिरासत में लेना था.

बग़दाद से बीबीसी संवाददाता बताते हैं कि शिया लड़ाकों के ख़िलाफ़ अभियान में जिस सक्रियता से अमरीकी और ब्रितानी सेना हिस्सा ले रही हैं, उससे साफ़ है कि इन्हें इराक़ी सेना की क्षमताओं पर कितना विश्वास है.

पिछले कुछ दिनों से इराक़ में शिया कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ सरकार की कार्रवाई में तेज़ी आई है. इस दौरान सैकड़ों लोगों के मारे जाने की ख़बरें आती रही हैं.

हालांकि अभी तक के हमलों में ज़्यादा नुकसान शिया कट्टरपंथियों को ही हुआ है और मेहदी सेना के कई कार्यकर्ता सैनिक हमलों के शिकार बने हैं.

चिंताजनक स्थिति

दरअसल, इराक़ी सरकार को चरमपंथियों और साथ ही शिया कट्टरपंथियों से कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है.

शिया लड़ाकों के ख़िलाफ़ सेना के अभियान में पिछले कुछ सप्ताहों से तेज़ी आई है. इराक़ सरकार पिछले दिनों में शिया लड़ाकों को लगातार समर्पण करने और हथियार छोड़ने की चेतावनी देती रही है.

इसी सप्ताह की शुरुआत में इराक़ी सेना ने नसीरिया में शिया लड़ाकों के ख़िलाफ़ एक बड़े अभियान के दौरान कम से कम 40 शिया लड़ाकों को मार दिया था.

उधर पिछले सप्ताह ही कट्टरपंथी इराक़ी शिया नेता और मेहदी सेना के प्रमुख मुक़्तदा अल सद्र ने चेतावनी दे चुके हैं कि अगर उनके समर्थकों पर हमले बंद नहीं किए गए तो वे 'खुली लड़ाई' छेड़ देंगे.

मुक़्तदा अल सद्र ने कहा था कि वो बग़दाद की सरकार को आख़िरी चेतावनी दे रहे हैं. उन्होंने इराक़ सरकार से शांति की राह पर आगे बढ़ने की अपील भी की थी.

इराक़ी सेना को इस अभियान में अमरीकी और ब्रितानी सैनिकों की मदद मिल रही है और इसी के सहारे इराक़ी सेना ने बग़दाद और उसके दक्षिण में मेहदी सेना के ख़िलाफ़ अपना अभियान तेज़ कर दिया है.

सद्र ने आरोप लगाया है कि सरकार में कुछ चरमपंथी तत्व घुस गए हैं और उन्हें नहीं रोका गया तो संघर्ष होना तय है.