शनिवार, 19 अप्रैल, 2008 को 02:59 GMT तक के समाचार
पोप बेनेडिक्ट ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि अगर किस देश में मानवाधिकारों का घोर हनन होता है और वहाँ की सरकार अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल साबित होती है तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हस्तक्षेप करना चाहिए.
उन्होंने न्यूयॉर्क में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मानवाधिकारों के हक़ में कोई भी कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र के क़ानूनी दायरे में रह कर करनी चाहिए.
पोप ने कहा कि उदासीनता बरतने या हस्तक्षेप न करने से स्थितियाँ और ख़राब हो जाती हैं.
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि ताकत सीमित लोगों के हाथों में है जबकि विश्वव्यापी समस्यायों का समाधान सामूहिक रुप से ही हो सकता है.
पोप ने उन देशों की आलोचना की जो बिना संयुक्त राष्ट्र की इजाज़त के ख़ुद अकेले ही कोई क़दम ले लेते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा करने से संयुक्त राष्ट्र के प्रभुत्व पर असर पड़ता है.
पोप ने कहा कि किसी देश को अकेले ही कोई कदम नहीं लेना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से सहमति बनाने में मुश्किलें पेश आती हैं और इससे विश्व की जटिल समस्याओं का समाधान ढूढ़ना और मुश्किल हो जाता है.
उन्होंने यहूदी समुदाय के एक धार्मिक स्थल की यात्रा की. वे ऐसा करने वाले पहले पोप हैं.