शनिवार, 19 अप्रैल, 2008 को 15:56 GMT तक के समाचार
चीन के कई शहरों में इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों ने फ़्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार की माँग की है. इन लोगों ने तिब्बत की आज़ादी के अभियान की भी आलोचना की.
बीजिंग, वुहान, किंगदाओ समेत कई शहरों में चीन के लोग बड़ी संख्या में जमा हुए. सुरक्षा चिंताओं के कारण पुलिस बल भी तैनात किए गए थे.
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि फ़्रांस की राजधानी पेरिस में ओलंपिक मशाल यात्रा के दौरान हुई हिंसा से वे नाराज़ हैं.
फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने अभी तक पुष्टि नहीं की है कि वो ओलंपिक उदघाटन समारोह में हिस्सा लेंगे या नहीं. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने इसके लिए भी फ़्रांसीसी राष्ट्रपति की निंदा की.
वुहान शहर में एक फ़्रांसीसी सुपरमार्केट की दुकान के बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया.
इस फ़्रांसीसी चेन की चीन में 100 से ज़्यादा दुकानें हैं. हालांकि ये चेन अगस्त में कह चुकी है कि वो बीजिंग ओलंपिक आयोजित करने के चीन के अधिकार का समर्थन करती है. लेकिन कई प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि फ़्रांसीसी सुपरमार्केट तिब्बत की आज़ादी का समर्थन करता रहा है.
'मीडिया का पक्षपात'
लोगों ने “तिब्बत की आज़ादी का विरोध करो, ओलंपिक का समर्थन करो” या “फ़्रांसीसी उत्पाद नहीं चाहिए” जैसे नारे लगाए.
तख़्तियों पर लिखे कई नारों पर तो फ़्रांसीसी झंडे में नाज़ियों का स्वास्तिका चिन्ह तक लगाया गया था.
राजधानी बीजिंग में फ़्रांसीसी दूतावास और एक फ़्रांसीसी स्कूल के बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया. लेकिन जल्द ही पुलिस ने स्थिति को संभाल लिया.
चीन के बाहर भी चीन के सर्मथन में लोगों ने प्रदर्शन किया है.
एपी के मुताबिक पेरिस में भी हज़ारों लोग टी-शर्ट पहने जमा हुए जिसपर लिखा हुआ था- ओलंपिक खेलों को एक तरह का पुल बनाएँ, दीवार नहीं.
उधर ब्रिटेन और मैनचेस्टर शहरों में बीबीसी के कार्यालयों के बाहर भी करीब 1300 लोग इकट्ठा हुए. इन लोगों का आरोप था कि पश्चिमी देशों का मीडिया चीन की रिपोर्टिंग में पक्षपात बरत रहा है.
पिछले कुछ दिनों में जहाँ-जहाँ भी ओलंपिक मशाल यात्रा हुई है, तिब्बत की आज़ादी के समर्थक लोगों ने इस दौरान तिब्बत में चीनी शासन के प्रति विरोध प्रदर्शन किया है.
लंदन और पेरिस जैसे शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद, बाक़ी देशों में ओलंपिक मशाल यात्रा के दौरान सुरक्षा
कड़ी करनी पड़ी है.