बुधवार, 09 अप्रैल, 2008 को 13:36 GMT तक के समाचार
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद चीन ने ज़ोर देकर कहा है कि ओलंपिक मशाल की दौड़ तिब्बत में भी आयोजित की जाएगी.
तिब्बत के चीन समर्थित गवर्नर ने कहा है कि वे मशाल की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले रहे हैं और अगर किसी ने मशाल दौड़ में बाधा डालने की कोशिश की तो उसे 'कड़ी सज़ा दी जाएगी'.
उनका बयान ऐसे समय पर आया है जबकि लंदन, पेरिस के बाद अब अमरीका के सैन फ्रैंसिस्को में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं.
ओलंपिक मशाल तीन सप्ताह तक चीन में रहने के बाद 20 जून को तिब्बत की राजधानी ल्हासा पहुँचेगी.
तिब्बत के गवर्नर कियांगबा पुनकोग ने बीजिंग में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मशाल दौड़ 'सुरक्षित और सफल रहेगी'.
उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि वे लोग मशाल दौड़ में बाधा डालने की कोशिश करेंगे, लेकिन ऐसा करने वालों से हम सख़्ती से निबटेंगे."
पुनकोग ने कहा, "कुछ लोग तिब्बत के नाम पर चीन विरोधी भावनाएँ भड़का रहे हैं जो सही नहीं है."
विरोध
दूसरी ओर, हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और तिब्बत की आज़ादी के समर्थक रिचर्ड गेयर ने कहा है कि चीन वहाँ मशाल दौड़ आयोजित करके जबरन यह साबित करना चाहता है कि वहाँ समाज में शांति और संतुलन है.
रिचर्ड गेयर ने कहा, "उनकी योजना मशाल को तिब्बत में ले जाकर यह साबित करने की है कि वह सब कुछ ठीक है, लेकिन यह झूठी कोशिश है और तिब्बतियों के लिए यह अपमानजनक है."
दक्षिण अफ्रीका के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आर्च बिशप डेसमंड टूटू ने दुनिया भर के नेताओं से अपील की है वे ओलंपिक के लिए चीन न जाएँ.
इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री केविन रड ने तिब्बत में चीन के मानवाधिकार रिकॉर्ड की कड़ी आलोचना की और अपील की कि चीन और दलाई लामा के बीच बातचीत हो.
बीजिंग विश्वविद्यालय में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा कि चीन को मानना होगा कि उस इलाक़े में मानवाधिकार की 'गंभीर समस्याएँ' हैं.