सोमवार, 07 अप्रैल, 2008 को 12:22 GMT तक के समाचार
लंदन के बाद फ़्रांस की राजधानी पेरिस में भी ओलंपिक मशाल दौड़ का जम कर विरोध हुआ है. सुरक्षा कारणों से चार बार ओलंपिक मशाल बुझाई गई.
विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पेरिस के सिटी हॉल में आयोजित होने वाले विशेष समारोह को रद्द कर दिया गया है.
अभी तक चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. रविवार को लंदन में भी मशाल दौड़ का विरोध हुआ था और क़रीब 37 लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया.
सोमवार को पेरिस के मशहूर आइफ़िल टॉवर के पास से जब मशाल दौड़ शुरू हुई, तो उसके बाहर बड़ी संख्या में तिब्बत समर्थक प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो गए.
विरोध प्रदर्शन के कारण कुछ देर के लिए मशाल दौड़ में बाधा आई और मशाल को एक बस पर रखा गया और सुरक्षा कारणों से अधिकारियों ने कुछ देर के लिए मशाल को बुझा भी दिया.
बाद में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई.
झड़प
मशाल दौड़ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था काफ़ी कड़ी थी. मशाल दौड़ के साथ-साथ पुलिस की गाड़ियाँ चल रही थी. दंगा पुलिस भी मशाल रिले की सुरक्षा में लगी थी.
सोमवार सुबह से तिब्बत समर्थक प्रदर्शन आइफ़िल टॉवर के पास ह्यूमन राइट्स स्क्वेयर के पास जमा होना शुरू हो गए थे. जैसे ही मशाल दौड़ शुरू हुई प्रदर्शनकारियों ने इसके पास पहुँचने की कोशिश की.
लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुई. उच्च स्तरीय सुरक्षा के बावजूद मशाल दौड़ के रास्ते में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे रहे.
फ़्रांस में तिब्बती समुदाय के नेता थुपतेन ग्यास्तो ने पेरिस के विरोध प्रदर्शनों के बारे में कहा कि वे चीनी अधिकारियों तक संदेश पहुँचाना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, "हम तिब्बत में मशाल दौड़ आयोजित नहीं करने की मांग करते हैं, क्योंकि चीन ओलंपिक मशाल का उपयोग तिब्बत पर अपने क़ब्ज़े को वैध ठहराने के लिए करना चाहता है, दुनिया का ध्यान बँटाना चाहता है. अगर चीन ओलंपिक खेलों का उपयोग राजनीतिक हित साधने के लिए करना चाहता है, तो हम चाहते हैं कि वह मशाल को तिब्बत में लेकर नहीं जाए."
फ़्रांस के दो राष्ट्रीय अख़बारों ने मशाल दौड़ को 'अनबन की मशाल' की संज्ञा दी है. तो वामपंथी विचार वाले लिबरल डेली ने ओलंपिक के छल्लों को हथकड़ी के रूप में दिखाया है.
लेकिन पेरिस स्थित चीनी दूतावास के सलाहकार ने कहा था कि मशाल दौड़ फ़्रांसीसी लोगों के लिए उत्सव जैसा है और इसका विरोध करने वाले बहुत कम संख्या में हैं.
दूसरी ओर ग़ैर सरकारी संस्था रिपोर्ट्स विदाउट बॉर्ड्स ने सांकेतिक और बड़े विरोध की बात कही थी. इस संस्था ने एथेंस में भी मशाल जलाए जाने का विरोध किया था.