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गुरुवार, 03 अप्रैल, 2008 को 12:27 GMT तक के समाचार

'सवाल आपके, जवाब ज़वाहिरी के'

अल क़ायदा के दूसरे सबसे बड़े नेता अयमन अल ज़वाहिरी ने 'जिहाद में निर्दोष मुसलमानों के मारे जाने को' सही ठहराया है.

ज़वाहिरी ने एक लंबे ऑडियो टेप में इसराइल के अंदर और बाहर यहुदियों पर हमले जारी रखने की बात कही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को मुसलमानों का दुश्मन बताया.

पेशे से डॉक्टर रहे ज़वाहिरी ने कहा कि ओसामा बिन लादेन पूरी तरह स्वस्थ हैं.

ज़वाहिरी का ऑडियो बयान क़रीब डेढ़ घंटे चलता है. ये एक तरह से ‘आपके सवाल, ज़वाहिरी के जवाब’ जैसे किसी कार्यक्रम की तरह है.

इसमें अल-क़ायदा नेता ने इंटरनेट के ज़रिए दुनिया भर के मुसलमानों की ओर से आए सैकड़ो सवालों में से कुछ के जवाब दिए हैं. माना जा रहा है कि ये अल-ज़वाहिरी के जवाबों की पहली किस्त है.

कई लोगों ने अल-ज़वाहिरी से बड़े ही तीखे सवाल किए थे. और जवाब देते हुए कई बार अल-क़ायदा नेता बचाव की मुद्रा में नज़र आते हैं.

किसी ने पूछा कि क्या आप मुसलमान औरतों और बच्चों की जान लेने को जिहाद मानते हैं?

इसके जवाब में अल-क़ायदा के दूसरे नंबर के शीर्ष नेता ने कहा है कि असल में निर्दोष लोगों को अमरीकी, यहूदी, रूसी और फ़्रांसीसी मार रहे हैं.

उनका कहना है कि यदि जिहादियों के हाथों आम आदमी मरते हैं, तो ऐसा कोई जानबूझ कर नहीं किया जाता है, बल्कि दुश्मन ताक़तें निर्दोषों को मानव-ढाल के तौर पर इस्तेमाल करती हैं.

एक अल्जीरियाई छात्र ने अल-ज़वाहिरी से पूछा कि वे अल्जीयर्स में दिसंबर में हुए एक बम हमले को कैसे सही ठहराएँगे, जिसमें कि सरकारी दफ़्तरों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया था.

इस सवाल के जवाब में अल-क़ायदा नेता ने अल्जीरिया सरकार पर देश को फ़्रांस और अमरीका के हाथों बेचने का आरोप लगाया, और संयुक्त राष्ट्र को इस्लाम का दुश्मन करार दिया.

मिस्र

ऑडियो बयान का एक बड़ा हिस्सा अल-ज़वाहिरी के अपने देश मिस्र के बारे में है. अल-क़ायदा नेता ने मिस्र के मुख्य विपक्षी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड की कड़ी आलोचना की है.

उन्होंने ख़ास तौर पर मुस्लिम ब्रदरहुड के एक बड़े धार्मिक नेता युसुफ़ अल-क़रादवी को आड़े हाथों लिया है, जो कि क़तर में रहते हैं.

अल-ज़वाहिरी के इस अप्रत्याशित सवाल-जवाब से साफ़ ज़ाहिर है कि अल-क़ायदा मुस्लिम दिलो-दिमाग़ को जीतने को लेकर बहुत ही गंभीर है.

इससे ये बात भी स्पष्ट है कि अल-क़ायदा आम मुसलमानों को मारने संबंधी आरोपों को लेकर बहुत ज़्यादा संवेदनशील है.