बुधवार, 02 अप्रैल, 2008 को 10:46 GMT तक के समाचार
ज़िम्बाब्वे के सरकारी अख़बार 'हेराल्ड' ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में कोई भी उम्मीदवार बहुमत नहीं जुटा सका है इसलिए वहाँ तीन सप्ताह के अंदर दोबारा मतदान कराए जा सकते हैं.
चुनाव विश्लेषकों के हवाले से अख़बार ने बुधवार को लिखा है कि नतीजों के रूझान से लगता है कि दोबारा चुनाव कराने की ज़रूरत होगी.
देश में शनिवार को मतदान कराया गया था लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी चुनाव आयोग ने आधिकारिक परिणाम घोषित नहीं किया है.
मतदान के बाद पहली बार सरकार नियंत्रित इस अख़बार ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति राबर्ट मुगाबे को स्पष्ट रूप से जीत नहीं मिली है.
अख़बार का अनुमान है कि संसदीय चुनावों में भी राष्ट्रपति मुगाबे या विपक्षी उम्मीदवार मॉर्गन चांगिरई की पार्टी को 50 फ़ीसदी वोट नहीं मिले हैं.
पूरे नतीजों की घोषणा के बाद यह तय होगा कि क्या राष्ट्रपति मुगाबे छठीं बार देश का नेतृत्व कर सकेंगे.
मुगाबे ज़िम्बाब्वे को 1980 में मिली आज़ादी के बाद से लगातार राष्ट्रपति हैं. इन चुनावों को 28 वर्षों के शासनकाल में उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है.
इस बीच विपक्षी दल मूवमेंट फ़ॉर डेमोक्रेटिक चेंज (एमडीसी) के मॉर्गन चांगिरई ने कहा है कि अगर नतीजों की घोषणा में और देरी की जाती है तो वह चुनाव परिणामों के अपने आकलन के आधार पर संभव परिणामों की घोषणा कर देंगे.
'बातचीत नहीं'
चांगिरई ने कहा है कि वह आधिकारिक नतीजे आने तक जीत का दावा नहीं करेंगे लेकिन उन्होंने इन आशंकाओं को खारिज़ कर दिया कि उनकी सत्ताधारी दल से कोई बातचीत चल रही है.
इससे पहले चांगिरई की पार्टी के सूत्रों ने बीबीसी से कहा था कि मुगाबे के पद छोड़ने के लिए एक समझौते का खाका तैयार हो गया है.
हालाँकि इस तरह के किसी समझौते या बातचीत की ख़बरों का सत्तारूढ़ दल ज़ानू-पीएफ़ के नेता ब्राइट मटोंगा ने भी खंडन किया है.
बीबीसी के दक्षिण अफ़्रीका संवाददाता पीटर बिल्स का कहना है कि वहाँ ऐसा मानने वालों की बड़ी संख्या है कि मुगाबे दोबारा मतदान का सामना नहीं करना चाहेंगे.
संवाददाता का कहना है कि अगर दोबारा मतदान कराए जाते हैं तो मुगाबे की राह और मुश्किल हो जाएगी क्योंकि निर्दलीय उम्मीदवार सिम्बा मकोनी को वोट देने वाले भी अब मुगाबे के ख़िलाफ़ वोट कर सकते हैं.
अब तक घोषित परिणामों के मुताबिक़ एमडीसी को 90 सीटें मिली हैं जबकि ज़ानू-पीएफ़ 85 सीटें ही जीत सकी है.
एमडीसी की 90 सीटों में पार्टी से टूटकर अलग हुए एक गुट की पाँच सीटें भी शामिल हैं. अभी 35 सीटों के परिणाम आने बाक़ी हैं.