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बुधवार, 02 अप्रैल, 2008 को 20:11 GMT तक के समाचार

28 साल बाद हारी मुगाबे की पार्टी

ज़िम्बाब्वे को ब्रिटेन से आज़ादी 1980 में मिली थी और तब से अब तक यानी पिछले 28 सालों से राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे की पार्टी ही वहाँ सत्तारुढ़ रही है.

अधिकृत परिणाम बताते हैं कि मुख्य विपक्षी मॉर्गन चांगिरई की पार्टी मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज यानी एमडीसी ने सबसे अधिक 99 सीटें जीत ली हैं जबकि राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे की पार्टी ज़ानू-पीएफ़ को 97 सीटें ही मिली हैं. इसके साथ ही मुगाबे की पार्टी ने संसद में अपना बहुमत खो दिया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हालांकि संसदीय चुनावों के परिणाम महत्वपूर्ण हैं लेकिन ज़िम्बाब्वे में सारे अधिकार राष्ट्रपति के पास हैं और अभी तक राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम घोषित नहीं किए गए हैं.

विपक्षी दल एमडीसी का कहना है कि राष्ट्रपति चुनाव में भी उनके नेता मॉर्गन चांगिराई की जीत हुई है लेकिन सरकार में मंत्री ब्राइट मोटोंगा ने कहा है कि कोई भी स्पष्ट रुप से विजयी नहीं हुआ है.

सरकार की ओर से संकेत दिए जा रहे हैं कि चुनाव दोबारा करवाए जा सकते हैं.

नियमानुसार राष्ट्रपति चुनाव दोबारा न हों इसके लिए ज़रुरी है कि राष्ट्रपति पद के विजेता को 50 प्रतिशत से ज़्यादा मत हासिल हुए हों.

एमडीसी पार्टी के महासचिव टेंडाई बिटी ने कहा है कि चांगिराई को 50.3 प्रतिशत मत मिले हैं जबकि राष्ट्रपति मुगाबे को सिर्फ़ 43.8 प्रतिशत मत मिले हैं इसलिए फिर से चुनाव की ज़रुरत नहीं है.
उनका कहना था कि चुनाव आयोग ने परिणाम घोषित नहीं किए हैं और इससे लोगों में 'हताशा और निराशा' है.

हालांकि एमडीसी ने साफ़ कर दिया है कि दोबारा चुनाव की स्थिति में वे फिर से चुनाव मैदान में उतरने को तैयार हैं

उधर संयुक्त राष्ट्र में ज़िम्बाब्वे के राजदूत ने कहा है कि संसदीय चुनावों में हार के बाद राष्ट्रपति मुगाबे का इरादा देश छोड़कर जाने का नहीं है.