ज़िम्बाब्वे के चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों के मतदान के 30 घंटे बाद नतीजों की घोषणा शुरू कर दी है.
छह संसदीय सीटों के परिणाम आ चुके हैं जिसमें तीन सीटें राष्ट्रपति राबर्ट मुगाबे की पार्टी ज़ानू पीएफ़ और तीन सीटें विपक्षी मूवमेंड फ़ॉर डेमोक्रेटिक चेंज (एमडीसी) ने जीत ली है.
परिणामों की घोषणा में देरी पर एमडीसी ने आरोप लगाया है कि सरकार को धाँधली के लिए समय देने के मक़सद से ऐसा किया जा रहा है क्योंकि उसे भारी जीत मिली है.
शनिवार को हुए चुनावों के पूरे नतीजों के बाद यह तय होगा कि क्या राष्ट्रपति मुगाबे छठीं बार देश का नेतृत्व कर सकेंगे.
मुगाबे ज़िम्बाब्वे को 1980 में मिली आज़ादी के बाद से लगातार राष्ट्रपति हैं. इन चुनावों को 28 वर्षों के शासनकाल में उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है.
मुगाबे को राष्ट्रपति पद के लिए विपक्षी पार्टी एमडीसी के नेता मॉर्गन चांगिरई से कड़ी चुनौती मिल रही है.
एमडीसी ने अनौपचारिक परिणामों के आधार पर जीत का दावा भी कर दिया है.
सूचना मंत्री शिखानाइसो ने एमडीसी पर आरोप लगाया है कि वह 'अनुमान और झूठ' का सहारा ले रही है जिससे 'अनावश्यक ख़ौफ़' पैदा हो रहा है.
चुनावी हिंसा को ध्यान में ऱखते हुए सेना की भारी तैनाती की गई है.
राजधानी हरारे की सड़कों पर दंगा निरोधक पुलिस गश्त लगा रही है और स्थानीय लोगों से घरों के अंदर रहने कहा गया है.
भारी कवायद
चुनाव अधिकारियों का कहना है कि इतने चुनावों को साथ कराने के कारण ही चुनाव परिणामों के सामने आने में देरी हो रही है.
चुनाव आयोग के अध्यक्ष जॉर्ज चिवेशे ने कहा, " ये बहुत ज़रूरी है कि गणना बहुत सावधानी से की जाए. आयोग को पता है कि परिणामों का इंतज़ार देश और विदेश में बेताबी से किया जा रहा है."
ज़िम्बाब्वे चुनाव सहायता नेटवर्क के प्रमुख नोएल कुतुत्वा कहते हैं, " परिणामों की घोषणा में देरी से इन आशंकाओं को बल मिल रहा है कि वहाँ कुछ चल रहा है."
दक्षिण अफ़्रीकी विकास समुदाय (एसएडीसी) के चुनाव पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनाव 'शांतिपूर्ण और विश्वसनीय' रहे.
लेकिन पर्यवेक्षक दल के दो दक्षिण अफ़्रीकी सदस्यों ने एक सकारात्मक प्रारंभिक रिपोर्ट पर दस्तख़त करने से इनकार कर दिया. इनमें से एक ने चुनावों में 'भारी गड़बड़ी' की बात कही है.
ज़्यादातर पश्चिमी देशों के पर्यवेक्षकों को चुनावों की निगरानी करने की अनुमति नहीं दी गई थी.
बुरे दौर में देश
राष्ट्रपति के अलावा शनिवार को ही असेंबली, सीनेट और स्थानीय निकायों के भी चुनाव कराए गए थे.
इस समय ज़िम्बाब्वे बहुत बुरे आर्थिक संकट से गुज़र रहा है. वहाँ मंहगाई की दर बहुत ज़्यादा है.
ज़िम्बाब्वे के आर्थिक संकट के लिए भी राष्ट्रपति राबर्ट मुगाबे ब्रिटेन और पश्चिमी देशों को ज़िम्मेदार मानते हैं.
पश्चिमी देशों ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं लेकिन इसका प्रभाव ज़्यादातर सत्तारूढ़ तबके पर ही माना जाता है.
मुगाबे के प्रमुख प्रतिद्वंदी चांगिरई तीसरी बार राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे हैं.
चांगिरई की पार्टी 'मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज' दो धड़ो में विभाजित है जिसके कारण उनके वोटों के बँटने की आशंका व्यक्त की गई थी.