सोमवार, 31 मार्च, 2008 को 14:06 GMT तक के समाचार
तुर्की में संवैधानिक अदालत ने सर्वसम्मति से तय किया है कि वो देश की सत्ताधारी पार्टी को बंद करने से जुड़े मामले की सुनवाई कर सकती है.
तुर्की के मुख्य अभियोजक ने याचिका दायर की थी कि सत्ताधारी एके पार्टी को धर्म-निरपेक्ष विरोधी गतिविधियाँ करने के लिए बंद कर दिया जाए.
उन्होंने ये भी कहा था कि पार्टी के सदस्यों को राजनीति से प्रतिबंधित कर दिया जाए जिसमें प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी शामिल है.
कोर्ट के इस फ़ैसले से तुर्की में धर्म निरपेक्ष ताकतों और सत्ताधारी एके पार्टी के बीच तनातनी और बढ़ गई है.
'इस्लामी एजेंडा'
एके पार्टी के ख़िलाफ़ लिखा गया मामला 162 पन्नों का है जिसमें अभियोजक ने बताया है कि कैसे सरकार इस्लामी एजेंडा चला रही है.
हिजाब पहनने को लेकर सरकार द्वारा नियमों में बदलाव की कोशिश को याचिका का मुख्य बिंदु बनाया गया है.
सत्ताधारी पार्टी ने हाल ही में संविधान में बदलाव किया था ताकि विश्वविद्यालयों में लड़कियाँ हिजाब पहन सकें. पहले तुर्की के विश्वविद्यालयों में महिलाओं के सिर पर दुपट्टा रखने या हिजाब पहनने पर पाबंदी थी.
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक धर्म निरपेक्ष गुटों से जुड़े लोगों को आशंका है कि इस्लामी देश बनाने की दिशा में ये पहला कदम है.
लेकिन एकेपी का कहना है कि उसके ख़िलाफ़ चल रही मुहिम लोकतंत्र पर हमला है.
चुनाव में एकेपी को 47 फ़ीसदी वोट मिले थे और ज़्यादातर मत सर्वेक्षणों के मुताबिक लोग हिजाब पहनने पर प्रतिबंध उठाने के पक्ष में हैं.
संवैधानिक अदालत अब सारे आरोपों की जाँच करेगी और ये क़ानूनी लड़ाई कई महीनों तक चलेगी.
संवाददाताओं का कहना है कि इससे तुर्की में राजनीतिक एजेंडे पर असर पड़ेगा- कई नई नीतियाँ शुरू नहीं हो पाएँगी और विदेशी निवेशक भी बाहर जा सकते हैं.
यूरोपीय संघ ने इस मामले पर चिंता जताई है और कहा है कि इससे संघ का सदस्य बनने की तुर्की की संभावनाओं पर असर पड़ेगा.