रविवार, 23 मार्च, 2008 को 18:28 GMT तक के समाचार
मध्य पूर्व के दौरे पर गए अमरीका के उपराष्ट्रपति डिक चेनी ने कहा है कि इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच शांति कायम करने के लिए दोनों पक्षों की तरफ़ से रियायतों की ज़रूरत होगी.
उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनी राष्ट्र बनना चाहिए लेकिन इसराइल पर होने वाले रॉकेट हमले शांति में बाधा डाल रहे हैं.
डिक चेनी ने फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री से पश्चिमी तट के शहर रमल्ला में मुलाक़ात के बाद ये बातें कहीं.
अमरीकी उपराष्ट्रपति मध्य पूर्व के दौरे पर हैं.
इस मध्य पूर्व दौरे का मकसद शांति प्रक्रिया को दोबारा शुरू करना है लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि दोनों तरफ़ के लोग इसे लेकर सशंकित हैं.
इस बीच फ़लस्तीनी गुटों फ़तह और हमास के बीच सीधी बातचीत शुरू करने के लिए सहमति हो गई है.
इसराइल को समर्थन
डिक चेनी ने कहा है कि वो उस दिन का इंतज़ार कर रहे हैं जब स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और शांत फ़लस्तीनी राष्ट्र बनेगा. लेकिन इसके लिए बहुत कोशिश करनी होगी और दोनों पक्षों को रियायतें देनी होंगी जो तकलीफ़देह हो सकता है.
लेकिन उपराष्ट्रपति ने सुरक्षा के मुद्दे पर इसराइल का पक्ष लिया है. उन्होंने कहा है कि अमरीका कभी भी इसराइल पर कोई ऐसा क़दम उठाने का दवाब नहीं डालेगा जिससे सुरक्षा पर असर पड़े.
डिक चेनी इसराइली प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट से भी मिले थे. उनके साथ एक संयुक्त पत्रवार्ता को संबोधित करते हुए डिक चेनी ने कहा था कि इसराइल की सुरक्षा को अमरीका का समर्थन 'अडिग' है.
फ़लस्तीनी इला़के से पहले डिक चेनी इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और सउदी अरब का दौरा कर चुके हैं और अमरीका लौटने से पहले वे तुर्की भी जाएँगे.
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने उम्मीद जताई है कि जनवरी में पद छोड़ने से पहले कोई शांति समझौता हो जाएगा.
एक मत सर्वेक्षण के मुताबिक ज़्यादातर लोगों को शक है कि इस शांति वार्ता से जल्द ही कोई नतीजा निकलेगा.