सोमवार, 17 मार्च, 2008 को 23:28 GMT तक के समाचार
तिब्बत में पिछले कुछ दिनों के दौरान रहे घटनाक्रम पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने चीन की सरकार और तिब्बत में चीन विरोधी प्रदर्शन कर रहे लोगों से अपील की है कि वहाँ हिंसा को तुरंत रोकने में अपना योगदान दें.
तिब्बत की चिंताजनक स्थिति पर सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बैठक में उन्होंने इस मुद्दे पर विचार-विमर्श भी किया.
हालांकि इस बैठक में सुरक्षा परिषद के सदस्य के नाते चीन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस पूरे मामले में सुरक्षा परिषद की कोई भूमिका नहीं बनती है. रूस ने चीन के इस तर्क का समर्थन किया है.
उधर यूरोपीय देशों के खेल मंत्रियों की एक बैठक में तिब्बत के घटनाक्रम के आधार पर बीजिंग ओलंपिक के बहिष्कार जैसी बात को खारिज कर दिया गया है.
समर्पण की समयसीमा
तिब्बत की राजधानी ल्हासा में अब स्थितियाँ नियंत्रित बताई जा रही हैं और पिछले 24 घंटे से भी ज़्यादा अंतराल में वहाँ से कोई अप्रिय घटना की ख़बर नहीं आई है.
सोमवार को मध्यरात्रि के दौरान (भारतीय समयानुसार रात साढ़े नौ बजे) चीन की ओर से प्रदर्शनकारियों को दी गई आत्मसमर्पण की चेतावनी की समयसीमा भी समाप्त हो चुकी है.
राजधानी ल्हासा में भारी तादाद में सशस्त्र बल और सेना की तैनाती है जो शहर में गश्त लगा रही है.
पिछले दिनों ल्हासा में चीन विरोधी प्रदर्शनों के दौरान चीन सरकार से संबंधित संपत्ति को नुकसान पहुँचा था.
इसके बाद चीन सरकार की ओर से प्रदर्शनों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की गई थी जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी.
चीन ने हिंसा के इस दौर के बाद चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि जो भी लोग इन प्रदर्शनों में शामिल थे, वे सोमवार रात तक सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दें.
गंभीर स्थिति
रविवार को जारी एक बयान में दलाई लामा ने कहा था कि चीन तिब्बत में 'सांस्कृतिक जनसंहार' की कार्रवाई कर रहा है.
उन्होंने कहा था कि हिंसा और इस दौरान लोगों के मारे जाने की घटनाओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाँच होनी चाहिए.
हालांकि सोमवार को ही एक वरिष्ठ चीनी अधिकारी ने इस बात से इनकार किया है कि तिब्बत के शहर ल्हासा में प्रदर्शनकारियों पर घातक हथियारों का प्रयोग किया गया.
उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान 13 लोगों की मौत हुई जबकि दलाई लामा का कहना है कि चीन की कार्रवाई में कम से कम 80 लोग मारे गए.
दूसरी ओर ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि ल्हासा में हिंसक प्रदर्शनों के बाद तिब्बतियों का आंदोलन कई अन्य प्रांतों में फैल गया है.