सोमवार, 17 मार्च, 2008 को 12:00 GMT तक के समाचार
रेडक्रॉस का कहना है कि इराक़ पर अमरीकी नेतृत्व में हुए हमले के पाँच साल बाद भी लाखों इराक़ियों को शुद्ध पानी, साफ़ शौच व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाएं नसीब नहीं हैं.
एजेंसी का कहना है कि इराक़ में मानवीय हालात बेहद ख़राब हैं.
उन्होंने चेतावनी दी है कि कुछ क्षेत्रों में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद लाखों लोग ऐसे भी हैं जो रोज़ी रोटी को लेकर परेशान हैं.
रिपोर्ट का कहना है कि कुछ परिवार अपनी कमाई का तिहाई हिस्सा यानी क़रीब 150 डॉलर तो शुद्ध पानी ख़रीदने में ख़र्च कर देते हैं.
अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस कमेटी की इस रिपोर्ट का कहना है कि इराक़ के ऐसे बदतर मानवीय हालात केवल तभी ठीक किए जा सकते हैं जब इराकी नागरिकों की रोज़मर्रा की ज़रूरतों पर ज़्यादा ध्यान दिया जाए.
दवाओं की कमी
रिपोर्ट का कहना है कि इराक़ में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अब तक के हालात से भी बदतर है. और जो सेवाएं उपलब्ध हैं वो इतनी महंगी हैं जिन्हें ज़्यादातर आम नागरिक वहन नहीं कर सकते.
इराक़ी अस्पतालों में प्रशिक्षित स्टाफ़ और ज़रूरी दवाओं की कमी है और जो सुविधाएं हैं भी, उनका रखरखाव ठीक प्रकार से नहीं किया जाता. इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में सिर्फ़ 30 हज़ार बिस्तर हैं जो 80 हज़ार की ज़रूरत के आधे से भी कम हैं.
एजेंसी का कहना है कि दशकों से चल रहे झगड़ों और आर्थिक परिस्थितियों के कारण मौजूदा हालात और बदतर हो गए हैं.
रिपोर्ट का कहना है कि हज़ारों इराक़ी लोग जंग की शुरूआत के समय से गायब हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दिनों हुई हिंसा में मारे गए लोगों में बहुत से लोगों की पहचान तो अब तक नहीं हुई है क्योंकि इराक़ की सरकारी संस्थाओं तक बहुत कम शव पहुँचे.
हज़ारों इराकी क़ैद में
देश में हिंसा की दर पिछले जून से 60 फ़ीसदी कम हो गई है फिर भी अमरीका के सैनिक कमांडर गेन डेविड पेट्रियस का कहना है कि स्थिति कभी भी बदल सकती है.
लेकिन रेडक्रॉस के बीट्रिस मेगेवेंद रोगो कहते हैं, "इराक़ के कुछ हिस्सों की बेहतर और सुरक्षित स्थिति से उन लाखों लोगों को मदद देना बंद नहीं किया जाना चाहिए जिन्हें उनके हालात पर छोड़ दिया गया है."
एजेंसी के अनुसार, हज़ारों इराक़ी जिनमें अधिकांश पुरुष हैं, क़ैद में हैं. इनमें 20 हज़ार लोग बसरा के नज़दीक बक्का के शिविर में हैं जिसे अमरीका के नेतृत्व वाली बहुराष्ट्रीय सेना चला रही है.
इराक़ रेडक्रास का दुनिया भर में सबसे बड़ा अभियान है जिसमें 600 लोग काम करते हैं और जिसका वार्षिक बजट 1060 लाख डॉलर है.