तिब्बत में चीन विरोधी प्रदर्शनों में शामिल लोगों के आत्मसमर्पण की समयसीमा भारतीय समयानुसार सोमवार की रात साढ़े नौ बजे समाप्त हो गई है.
इस दौरान राजधानी ल्हासा में भारी तादाद में सशस्त्र बल और सेना की तैनाती की गई है जो शहर में गश्त लगा रही है.
पिछले 24 घंटों के दौरान ल्हासा में किसी चीन विरोधी प्रदर्शन की ख़बरें नहीं हैं और शहर नियंत्रण में लग रहा है. वहाँ से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है.
पिछले दिनों ल्हासा में चीन विरोधी प्रदर्शनों के दौरान चीन सरकार से संबंधित संपत्ति को नुकसान पहुँचा था.
इसके बाद चीन सरकार की ओर से प्रदर्शनों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की गई थी जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी.
चीन ने हिंसा के इस दौर के बाद चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि जो भी लोग इन प्रदर्शनों में शामिल थे, वे सोमवार रात तक सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दें.
ऐसा न करने की स्थिति में सरकार और कड़े क़दम उठाने और प्रदर्शनों में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी.
हालांकि चीन सरकार के मुताबिक प्रदर्शनों के दौरान केवल 13 लोगों की मौत हुई थी पर तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के मुताबिक मरनेवालों की तादाद 80 से ज़्यादा रही थी.
'सांस्कृतिक जनसंहार'
रविवार को जारी एक बयान में दलाई लामा ने कहा था कि चीन तिब्बत में 'सांस्कृतिक जनसंहार' की कार्रवाई कर रहा है.
उन्होंने कहा था कि हिंसा और इस दौरान लोगों के मारे जाने की घटनाओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाँच होनी चाहिए.
हालांकि सोमवार को ही एक वरिष्ठ चीनी अधिकारी ने इस बात से इनकार किया है कि तिब्बत के शहर ल्हासा में प्रदर्शनकारियों पर घातक हथियारों का प्रयोग किया गया.
उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान 13 लोगों की मौत हुई जबकि दलाई लामा का कहना है कि चीन की कार्रवाई में कम से कम 80 लोग मारे गए.
दूसरी ओर ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि ल्हासा में हिंसक प्रदर्शनों के बाद तिब्बतियों का आंदोलन कई अन्य प्रांतों में फैल गया है.
अबा और सिचुआन प्रांतों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ. इस दौरान पुलिस चौकी पर भी हमला किया गया.
चीन सरकार पहले ही विदेशी लोगों को ल्हासा छो़ड़ने की सलाह दे चुकी है और जो पर्यटक वहाँ आना चाहते थे, उनकी यात्राओं को निलंबित कर दिया गया है.