रविवार, 16 मार्च, 2008 को 23:36 GMT तक के समाचार
तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख और आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा है कि चीन ने तिब्बत में जो हिंसा की है उसकी जाँच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होनी चाहिए.
उन्होंने तिब्बत में मारे गए प्रदर्शनकारियों के लिए चीन को आड़े हाथों लेते हुए इसे 'सांस्कृतिक जनसंहार' करार दिया है.
दलाई लामा ने कहा कि चीन सरकार ने प्रदर्शनकारियों के आत्मसमर्पण के लिए सोमवार तक की जो समयसीमा तय की है, उसे लेकर वो ख़ासे चिंतित हैं और असहाय महसूस कर रहे हैं.
तिब्बती गुरू ने आशंका व्यक्त की कि अभी तक प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाइयों में 100 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
हालांकि चीन सरकार का कहना है कि इस हिंसा में कुल 10 लोग ही मारे गए हैं.
मारे गए प्रदर्शनकारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत में धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बती सरकार के लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर एक शांतिमार्च निकाला.
उधर चीन सरकार ने कहा है कि तिब्बत की राजधानी ल्हासा में स्थितियां अब लगभग नियंत्रित हो चुकी है. इस दौरान भारी हथियारों से लैस सैकड़ों की तादाद में पुलिसकर्मियों ने शहर की सड़कों पर गश्त लगाई.
चीन सरकार ने विदेशी लोगों को ल्हासा छो़ड़ने की सलाह दी है और जो पर्यटक वहाँ आना चाहते थे, उनकी यात्राओं को निलंबित कर दिया गया है.
चिंता
दलाई लामा ने आशंका जताई है कि यदि चीन अपनी नीति नहीं बदलता है तो तिब्बत में और मौतें हो सकती हैं.
दलाई लामा ने बीबीसी से हुई विशेष बातचीत में कहा है कि उन्हें ख़बर मिली हैं कि शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान ल्हासा में सौ लोगों की मौत हुई है, हालांकि इस संख्या की पुष्टि नहीं की जा सकती.
निर्वासित नेता ने शुक्रवार को ल्हासा शहर में हुए हिंसक प्रदर्शन पर 'गहरी चिंता' जताई है. हालांकि उन्होंने चीन में इन गर्मियों में आयोजित होने जा रहे ओलंपिक खेलों का समर्थन किया है.
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को ल्हासा में हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान कई लोग हताहत हुए थे. अमरीका सहित दुनिया के कई देशों ने चीन से संयम बरतने की अपील की है.
तिब्बत में चीन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों को वहाँ के अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने के लिए सोमवार तक का समय दिया है.
चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से आए एक बयान में सरकार ने कहा है कि लोग सोमवार आधी रात तक ख़ुद को प्रशासन के हवाले कर दें. प्रशासन का कहना है कि ऐसे लोगों के प्रति नरमी बरती जाएगी.
1989 के बाद से तिब्बत में हुई ये सबसे बड़ी हिंसक घटना है. 1959 में चीनी शासन के ख़िलाफ़ हुए संघर्ष की बरसी पर सोमवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरु हुए थे लेकिन शुक्रवार को हिंसा भड़क उठी.