रविवार, 16 मार्च, 2008 को 21:13 GMT तक के समाचार
ईरान में संसद के लिए हुए आम चुनावों की मतगणना के बाद स्पष्ट हो गया है कि कट्टरवादी-रूढ़िवादी धड़ों का संसद पर नियंत्रण क़ायम रहेगा.
राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के नेतृत्व वाले इस रूढ़िवादी धड़े को स्पष्ट बहुमत मिल गया है.
हालांकि इसी रूढ़िवादी राजनीतिक दलों के धड़े में ऐसे लोगों को भी अच्छी तादाद में क़ामयाबी हासिल हुई है जो कि अहमदीनेजाद की आलोचना करते आ रहे हैं.
सुधारवादियों को इस चुनाव में पहले से अधिक सफलता मिली है. ये परिणाम ऐसे स्थिति में आए हैं जब कई सुधारवादी लोगों को चुनाव में उतरने ही नहीं दिया गया.
तेहरान से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर नवगठित संसद वर्तमान राष्ट्रपति अहमदीनेजाद के लिए दिक्कतें खड़ी करती है तो इससे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला ख़ामेनेई और मज़बूत होंगे.
और जहाँ तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और विदेश नीति का सवाल है, ख़ामेनेई का मज़बूत होना ईरान के ताज़ा रवैये को और कठोर और तेज़ करेगा.
चुनाव
ईरान की संसद मजलिस के चुनाव के लिए शुक्रवार को मतदान हुआ था. चुनाव में मजलिस की 290 सीटों के लिए लोगों ने वोट डाले.
मजलिस का यह चुनाव अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की राजनीतिक तस्वीर भी साफ़ करेगा. संसद को राष्ट्रपति या उसके मंत्रियों को पद से हटाने का अधिकार हासिल है.
ईरान में संसद का सदस्य होने के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता और इस्लाम में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करनी होती है.
उल्लेखनीय है कि चुनाव के मैदान में खड़े 7597 उम्मीदवारों में से 40 प्रतिशत उम्मीदवारों को चुनाव के अयोग्य ठहरा दिया गया था.
इन उम्मीदवारों में अधिकांश उदार विचारों के थे जो ईरान में राजनीतिक सुधारों का समर्थन करते हैं. इनमें से कुछ पूर्व मंत्री रह चुके हैं.
ईरान में चार साल पहले हुए संसदीय चुनाव में रुढ़िवादियों का वर्चस्व रहा था. इनमें से अनेक ईरान के मौजूदा कट्टरपंथी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के समर्थक हैं.