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रविवार, 16 मार्च, 2008 को 07:06 GMT तक के समाचार

तिब्बत में '80 लोगों' की मौत

तिब्बत की निर्वासित सरकार का कहना है कि चीन के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 80 लोग मारे गए हैं.

निर्वासित सरकार के अधिकारियों ने कहा है कि की सूत्रों से मृतकों की संख्या की पुष्टि हुई है. चीन के मुताबिक मरने वालों की संख्या 10 है.

वहीं तिब्बत के निर्वासित सरकार के प्रमुख और आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने आशंका जताई है कि यदि चीन अपनी नीति नहीं बदलता है तो तिब्बत में और मौतें हो सकती हैं.

दलाई लामा ने बीबीसी से हुई विशेष बातचीत में कहा है कि उन्हें ख़बर मिली हैं कि शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान ल्हासा में सौ लोगों की मौत हुई है, हालांकि इस संख्या की पुष्टि नहीं की जा सकती.

निर्वासित नेता ने शुक्रवार को ल्हासा शहर में हुए हिंसक प्रदर्शन पर 'गहरी चिंता' जताई है.

हालांकि उन्होंने चीन में इन गर्मियों में आयोजित होने जा रहे ओलंपिक खेलों का समर्थन किया है.

तिब्बतियों का प्रदर्शन

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को ल्हासा में हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान कई लोग हताहत हुए थे. चीन की सरकारी एजेंसी ने कहा है कि इसमें दस लोगों की मौत हुई है.

इस बीच चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत की राजधानी ल्हासा में चीनी सेना ने अपना नियंत्रण बढ़ा दिया है और सूनी सड़कों पर सैनिक बख़्तरबंद गाड़ियों के साथ गश्त लगा रहे हैं.

अमरीका सहित दुनिया के कई देशों ने चीन से संयम बरतने की अपील की है.

सेना का नियंत्रण

ल्हासा पर चीन ने नियंत्रण बढ़ा लिया है.

सेना और सुरक्षाबलों के जवान बड़ी संख्या में तैनात कर दिए गए हैं और सेना की बख़्तरबंद गाड़ियाँ सूनी सड़कों पर गश्त लगा रही हैं.

अभी भी यदाकदा गोलियों की आवाज़ें सुनाई पड़ जाती हैं.

ल्हासा में मौजूद एक ब्रितानी पत्रकार का कहना है कि शनिवार को भी वहाँ सुरक्षाबलों ने कर्फ़्यू का उल्लंघन कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए अश्रुगैस का प्रयोग किया.

लेकिन उनका कहना है कि यह प्रदर्शन शुक्रवार के हिंसक प्रदर्शनों जैसे नहीं थे.

उधर तिब्बत में चीन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करे लोगों को वहाँ के अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने के लिए सोमवार तक का समय दिया है.

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से आए एक बयान में सरकार ने कहा है कि लोग सोमवार आधी रात तक ख़ुद को प्रशासन के हवाले कर दें. प्रशासन का कहना है कि ऐसे लोगों के प्रति नरमी बरती जाएगी.

1989 के बाद से तिब्बत में हुई ये सबसे बड़ी हिंसक घटना है. 1959 में चीनी शासन के ख़िलाफ़ हुए संघर्ष की बरसी पर सोमवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरु हुए थे लेकिन शुक्रवार को हिंसा भड़क उठी.