शनिवार, 15 मार्च, 2008 को 22:26 GMT तक के समाचार
ईरान में अभी तक सामने आए चुनाव परिणामों के आधार पर ऐसा लग रहा है कि राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के नेतृत्व वाले रूढ़िवादी गठबंधन का संसद पर नियंत्रण बना रहेगा.
पर इसी रूढ़िवादी राजनीतिक दलों के धड़े में ऐसे लोगों को भी कुछ इलाकों में बड़ी क़ामयाबी हासिल हुई है जो कि अहमदीनेजाद की आलोचना करते आ रहे हैं.
इन सुधारवादियों का कहना है कि इस चुनाव में उन्हें भी जितनी सफलता मिली है वो उनकी अपेक्षाओं से कहीं अधिक है.
राजनीतिक सुधार की बात करने वालों को क़रीब 34 सीटें मिली हैं. ये परिणाम ऐसे स्थिति में आए हैं जब कई सुधारवादी लोगों को चुनाव में उतरने ही नहीं दिया गया.
ईरान की संसद मजलिस के चुनाव के लिए शुक्रवार को मतदान हुआ था. चुनाव में मजलिस की 290 सीटों के लिए लोगों ने वोट डाले.
मजलिस का यह चुनाव अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की राजनीतिक तस्वीर भी साफ़ करेगा. संसद को राष्ट्रपति या उसके मंत्रियों को पद से हटाने का अधिकार हासिल है.
राजनीतिक सुधार की बात
वर्तमान संसद के कुछ सदस्य राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की नीतियों की खुलकर आलोचना करते रहे हैं. ये वे सांसद हैं जो राजनीतिक सुधार के पैरोकार हैं.
संसद के रुढ़िवादी सदस्य ईरान में राजनीतिक सुधारों मसलन प्रेस के उदारीकरण और स्वंयसेवी संस्थाओं को ईरान में बढ़ावा दिए जाने का विरोध करते हैं.
ईरान में संसद का सदस्य होने के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता और इस्लाम में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करनी होती है.
उल्लेखनीय है कि चुनाव के मैदान में खड़े 7597 उम्मीदवारों में से 40 प्रतिशत उम्मीदवारों को चुनाव के अयोग्य ठहरा दिया गया है.
इन उम्मीदवारों में अधिकांश उदार विचारों के थे जो ईरान में राजनीतिक सुधारों का समर्थन करते हैं. इनमें से कुछ पूर्व मंत्री रह चुके हैं.
ईरान में चार साल पहले हुए संसदीय चुनाव में रुढ़िवादियों का वर्चस्व रहा था. इनमें से अनेक ईरान के मौजूदा कट्टरपंथी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के समर्थक हैं.