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बुधवार, 12 मार्च, 2008 को 02:20 GMT तक के समाचार

मध्यपूर्व में अमरीकी कमांडर का इस्तीफ़ा

इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के सैन्य कमांडर विलियम फ़ैलन ने राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से मतभेदों की चर्चा के बीच अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

उन्होंने कहा, "मेरे विचारों और प्रशासन की नीतियों में मतभेद को लेकर लोगों की जो धारणा है वह परेशानी में डालने वाली है."

यह विवाद एक पत्रिका 'एस्क्वायर' के उस लेख के बाद खड़ा हुआ है जिसमें एडमिरल फ़ैलन ने कहा था कि वे परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़ हैं.

63 वर्षीय एडमिरल फ़ैलन एक साल पहले मध्यपूर्व में अमरीकी कमांडर नियुक्त किए गए थे.

अमरीकी रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स ने विलियम फ़ैलन के समय से पहले पद छोड़ने के फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह उनका अपना फ़ैसला है. हालांकि उन्होंने इस फ़ैसले को सही ठहराया.

मतभेद पर सफ़ाई

गेट्स ने पेंटागन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "मैंने समय से पहले सेवानिवृत होने के अनुरोध को अनिच्छापूर्वक और ख़ेद के साथ स्वीकार कर लिया है."

उन्होंने कहा कि एडमिरल फ़ैलन की कमी उन्हें बेहद खलेगी.

राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एडमिरल के इस्तीफ़े पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति में जो सुधार हुआ है उसका श्रेय एडमिरल फ़ैलन को मिलना चाहिए."

'एस्क्वायर' पत्रिका के लेख में संकेत दिए गए थे कि फ़ैलन राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ खड़े हुए दिख रहे हैं जो ईरान पर हमले की तैयारियों में लगे हुए हैं.

इस लेख में एडमिरल फ़ैलन को 'राष्ट्रपति बुश और ईरान पर हमले के बीच में खड़े सबसे ताक़तवर व्यक्ति' के रुप में पेश किया गया है.

अमरीकी रक्षामंत्री ने कहा है कि जैसे कि लेख में संकेत दिए गए हैं कि अमरीका ईरान पर हमले की तैयारी कर रहा है और एडमिरल फ़ैलन इसके ख़िलाफ़ हैं, अपने आपमें 'हास्यास्पद' है.

उन्होंने कहा, "यह ग़लत धारणा है कि बुश प्रशासन की ईरान नीति से एडमिरल फ़ैलन असहमत हैं. मुझे नहीं लगता कि कोई मतभेद है."

वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता एडम ब्रूक्स का कहना है कि एडमिरल फ़ैलन का इस्तीफ़ा इस बात के संकेत देता है कि सेना और व्हाइट हाउस के बीच मतभेद अपने चरम पर है.

उल्लेखनीय है कि इस बात की चर्चा पिछले कुछ महीनों से हो रही है कि क्या अमरीका ईरान पर हमले की तैयारी कर रहा है.

हालांकि अमरीका की घोषित नीति यह है कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई टालने के लिए उस पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव का सहारा लेना चाहिए.

अमरीका और कई यूरोपीय देश आरोप लगाते हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम हथियार बनाने के लिए हैं. जबकि ईरान इससे इनकार करता है.