सोमवार, 03 मार्च, 2008 को 19:42 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंध लगाने की मंज़ूरी दे दी है. ईरान पर चोरी छिपे परमाणु कार्यक्रम चलाने का आरोप है.
सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी और दस अस्थायी सदस्यों में से 14 देशों ने प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा लिया जबकि इंडोनेशिया तटस्थ रहते हुए अलग रहा.
पश्चिमी देशों को संदेह है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है.
लेकिन ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हैं.
सुरक्षा परिषद के प्रभावशाली देश ईरान से यूरेनियम संवर्धन रोकने की माँग करते रहे हैं जिसे वह ठुकरा चुका है.
यूरेनियम संवर्धन परमाणु हथियार बनाने के लिए एक आवश्यक प्रक्रिया है.
इससे पहले वर्ष 2006 और वर्ष 2007 में ईरान के ख़िलाफ़ दो बार प्रतिबंध लग चुके हैं.
प्रतिबंधों के ताज़ा और तीसरे सेट का प्रस्ताव औपचारिक तौर पर ब्रिटेन और फ़्रांस ने पेश किया.
इसमें संपत्तियाँ फ़्रीज़ करने और ईरान के कुछ अधिकारियों पर वीज़ा प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है.
प्रतिबंध का दायरा बढ़ाते हुए इसमें अधिक से अधिक ईरानी कंपनियों और अधिकारियों को शामिल किया गया है.
प्रतिबंध के प्रस्ताव का पाँचो स्थायी सदस्य देशों फ़्रांस, ब्रिटेन, रूस, अमरीका और चीन ने समर्थन किया.
मतदान से पहले संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अली असग़र ने इस प्रस्ताव को राजनीति से प्रेरित करार दिया.
इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सौ साल के लिए प्रस्ताव पारित कर सकता है लेकिन उससे ईरान को कोई नुक़सान नहीं पहुँचेगा.